किस राज्य में होली को क्या कहते हैं?

हिंदुओं का यह त्योहार भारत, श्रीलंका, नेपाल व मॉरिशस समेत दुनिया के कई देशों में मनाया जाता है। हर देश और राज्य में होली को अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है। प्रत्येक राज्य में होली को मनाने के तरीके भी अलग-अलग हैं। आओ जानते हैं होली के संबंध में कुछ रोचक।
 
कब मनाते हैं होली?
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन होली का पर्व मनाया जाता है और पंचमी को रंग पंचमी मनाई जाती है। 
 
क्यों मनाते हैं होली?
होली के दिन पांच घटनाएं हुई थी। पहला असुर हरिण्याकश्यप की बहन होलिका दहन हुआ था। दूसरा शिव ने कामदेव को भस्म करने के बाद जीवित किया था। तीसरा इस दिन कृष्ण ने राधा पर रंग डाला था। चौथा त्रैतायुग के प्रारंभ में विष्णु ने धूलि वंदन किया था। और, पांचवां इसी दिन राजा पृथु ने राज्य के बच्चो को बजाने के लिए राक्षसी ढुंढी को लकड़ी जलाकर आग से मार दिया था। परंपरागत रूप से, यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।
 
 
क्या करते हैं होली पर?
होली होलिका दहन होता है। दूसरे दिन धुलैंडी के दिन जिनके यहां कोई मर गया है उन्हें रंग डालने जाते हैं। पांचवें दिन रंग पंचमी पर रंगों से होली खेलते हैं। हालांकि होलिका दहन से ही रंग चढ़ने लगता है। होली मिलन समारोह आयोजित कर लोग रंग और गुलाल अबीर एक-दूसरे पर लगाते हैं, भांग पीते हैं, मिठाई खाते और गुझिया खाते हैं।
 
होली का इतिहास
प्राचीनकाल में होली को होलाका के नाम से जाना जाता था और इस दिन आर्य नवात्रैष्टि यज्ञ करते थे। होलिका दहन के बाद 'रंग उत्सव' मनाने की परंपरा भगवान श्रीकृष्ण के काल से प्रारंभ हुई। तभी से इसका नाम फगवाह हो गया, क्योंकि यह फागुन माह में आती है। वक्त के साथ सभी राज्यों में होली को मनाने और उसको स्थाननीय भाषा में अन्य नाम से पुकारने लगे। प्राचीन भारतीय मंदिरों की दीवारों पर होली उत्सव से संबंधित विभिन्न मूर्ति या चित्र अंकित पाए जाते हैं। अहमदनगर चित्रों और मेवाड़ के चित्रों में भी होली उत्सव का चित्रण मिलता है। ज्ञात रूप से यह त्योहार 600 ईसा पूर्व से मनाया जाता रहा है। सिंधु घाटी की सभ्यता के अवशेषों में भी होली और दिवाली मनाए जाने के सबूत मिलते हैं।
 
 
बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश
बिहार और उत्तर प्रदेश में होली को फगुआ, फाग और लठमार होली कहते हैं। खासकर मथुरा, नंदगांव, गोकुल, वृंदावन और बरसाना में इसकी धूम होती है।
 
 
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान 
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में होली वाले दिन होलिका दहन होता है, दूसरे दिन धुलैंडी मनाते हैं और पांचवें दिन रंग पंचमी मनाते हैं। यहां के आदिवासियों में होली की खासी धूम होती है।
 
महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा
महाराष्ट्र में होली को 'फाल्गुन पूर्णिमा' और 'रंग पंचमी' के नाम से जानते हैं। गोवा के मछुआरा समाज इसे शिमगो या शिमगा कहता है। गोवा की स्थानीय कोंकणी भाषा में शिमगो कहा जाता है। गुजरात में गोविंदा होली की खासी धूम होती है।
 
हरियाणा और पंजाब
हरियाणा में होली को दुलंडी या धुलैंडी के नाम से जानते हैं। पंजाब में होली को 'होला मोहल्ला' कहते हैं।
 
 
पश्चिम बंगाल और ओडिशा
पश्चिम बंगाल और ओडिशा में होली को 'बसंत उत्सव' और 'डोल पूर्णिमा' के नाम से जाना जाता है।
 
तमिलनाडु और कर्नाटक 
तमिलनाडु में लोग होली को कामदेव के बलिदान के रूप में याद करते हैं। इसीलिए यहां पर होली को कमान पंडिगई, कामाविलास और कामा-दाहानाम कहते हैं। कर्नाटक में होली के पर्व को कामना हब्बा के रूप में मनाते हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगना में भी ऐसी ही होली होती है।
 
 
मणिपुर और असम 
मणिपुर में इसे योशांग या याओसांग कहते हैं। यहां धुलेंडी वाले दिन को पिचकारी कहा जाता है। असम इसे 'फगवाह' या 'देओल' कहते हैं। त्रिपुरा, नगालैंड, सिक्किम और मेघालय में भी होली की धूम रहती है। 
 
उत्तराखंड और हिमाचल
यहां होली को भिन्न प्रकार के संगीत समारोह के रूप में मनाया जाता है, जिसे बैठकी होली, खड़ी होली और महिला होली कहते हैं। यहां कुमाउनी होली होली प्रसिद्ध है।

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