Rangpanchami 2026: रंगपंचमी कैसे मनाएं, जानिए 5 खास बातें

WD Feature Desk

गुरुवार, 5 मार्च 2026 (11:06 IST)
Rangpanchami traditions India: होली के पांच दिन बाद आने वाली रंगपंचमी का उत्साह विशेष रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश (खासकर इंदौर) और राजस्थान में देखने को मिलता है। यह त्योहार न केवल रंगों का है, बल्कि यह देवताओं के आगमन और सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक है।ALSO READ: Rang Panchami 2026: किस देवता को कौन-सा रंग चढ़ाने से मिलती है कृपा? जानिए पूजा विधि
 

अगर आप इस बार रंगपंचमी को यादगार बनाना चाहते हैं, तो ये 5 खास बातें जरूर जानें:

  1. 'गुलाल' का महत्व और देवताओं का स्वागत
  2. इंदौर की प्रसिद्ध 'गेर' का आनंद
  3. सात्विक भोजन और पकवान
  4. त्वचा और बालों की सुरक्षा
  5. सामाजिक सौहार्द और मिलन
  6. रंगपंचमी-FAQs
 

1. 'गुलाल' का महत्व और देवताओं का स्वागत

रंगपंचमी में रंगों का बहुत महत्व होता है। इसे 'रंगों का पर्व' भी कहा जाता है। माना जाता है कि रंगपंचमी पर हवा में उड़ाया गया गुलाल एक 'कवच' बनाता है, जिससे वातावरण में मौजूद नकारात्मकता दूर होती है और दैवीय शक्तियां आकर्षित होती हैं। इस दिन भारी गीले रंगों के बजाय सूखे गुलाल का उपयोग करना अधिक शुभ माना जाता है। इस त्योहार में प्रत्येक रंग का एक विशेष महत्व होता है, जैसे लाल रंग, प्रेम और शक्ति का प्रतीक माना जाता है, तो पीला रंग, खुशी और ऊर्जा का प्रतीक होता है। नीले रंग को शांति और स्थिरता का प्रतीक माना गया है और हरा रंग, खुशहाल जीवन और समृद्धि का प्रतीक होता है। इसके अलावा भी अन्य रंगों का अपना महत्व और लाभ है। 
 

2. इंदौर की प्रसिद्ध 'गेर' का आनंद

अगर आप मध्य प्रदेश में हैं, तो इंदौर की गेर यानी रंगों के जुलूस में शामिल होना एक अनूठा अनुभव है। लाखों लोग सड़कों पर निकलते हैं और नगर निगम की मिसाइलों से हवा में रंग और पानी की बौछार की जाती है। यह सामूहिक उल्लास का सबसे बड़ा उदाहरण है।
 

3. सामाजिक सौहार्द और मिलन

रंगपंचमी का मुख्य आकर्षण रंगों के साथ खेलना होता है। लोग एक-दूसरे को रंगों से रंगते हैं, पिचकारी से रंगीन पानी फेंकते हैं और बहुत सारी मस्ती करते हैं। यह दिन होली की मस्ती का विस्तार होता है, जहां लोग एक-दूसरे के साथ दोस्ती और प्रेम का इजहार करते हैं। रंगपंचमी का असली उद्देश्य ऊंच-नीच और भेदभाव को भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाना है। यह दिन पुराने मनमुटाव को खत्म कर नए रिश्तों की शुरुआत करने का सबसे अच्छा मौका होता है। 

 

4. सात्विक भोजन और पकवान

किसी भी भारतीय त्योहार की तरह रंगपंचमी भी पकवानों के बिना अधूरी है। महाराष्ट्र में इस दिन पूरन पोली बनाने की खास परंपरा है। उत्तर भारत के हिस्सों में केसरिया ठंडाई और गरमा-गरम मालपुए उत्सव का स्वाद बढ़ा देते हैं। इस दिन कुछ खास मिठाइयाँ और पकवान बनाए जाते हैं। जैसे कि गुलाब जामुन, वड़ा पाव, पोहा, पुरन पोली, ठंडाई, मालपुआ, गुजिया, नमकीनपारे और दही बड़ा आदि। ये पकवान दोस्त-रिश्तेदारों के साथ बांटने की परंपरा होती है, जिससे पर्व की खुशियां और भी बढ़ जाती हैं।
 

5. त्वचा और बालों की सुरक्षा

रंगों के साथ मस्ती करते समय अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। जैसे खेलने से पहले शरीर और बालों पर नारियल या सरसों का तेल लगाएं। सिर्फ हर्बल या नेचुरल रंगों का उपयोग करें ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे। आंखों को बचाने के लिए चश्मा पहनना एक स्मार्ट विकल्प है। याद रहे कि रंग खेलने के बाद त्वचा को रगड़कर साफ न करें, बल्कि उबटन या हल्के साबुन का इस्तेमाल करें।
 

रंगपंचमी-FAQs

 
1. रंगपंचमी कब मनाई जाती है?
रंगपंचमी होली के लगभग पांच दिन बाद फाल्गुन माह में मनाई जाती है।
 
2. रंगपंचमी क्यों मनाई जाती है?
मान्यता है कि इस दिन रंगों के माध्यम से खुशी, सकारात्मक ऊर्जा और भाईचारे का संदेश फैलाया जाता है।
 
3. रंगपंचमी किन राज्यों में ज्यादा प्रसिद्ध है?
यह त्योहार मुख्य रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

इसतरह रंगपंचमी का पर्व जितना रंगीन होता है, उतना ही मजेदार भी। इस दिन का आनंद उठाकर, हम जीवन में रंगों की तरह खुशियां फैला सकते हैं।
 
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