Holika Dahan Ke Upay 2026: प्रचलित लोकोक्ति है 'बभुक्षति किं ना करोतु पापं' अर्थात् भूखा कौन सा पाप नहीं करता। युगों-युगों से दरिद्रता एक अभिशाप है। धन का अभाव मनुष्य के मानसिक एवं शारिरिक कष्टों का द्योतक है। कभी-कभी प्रारब्ध कर्मानुसार अत्यधिक परिश्रम करने के उपरान्त भी मनुष्य को आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता है। उसे अपने परिश्रम के अनुसार धनलाभ नहीं होता है। इसके उलट वह अपनी दैनंदिन आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु कर्ज के दलदल धंसता चला जाता है।ALSO READ: Holi 2026 Date Confused: 2 मार्च को भद्रा तो 3 को ग्रहण, जानें ज्योतिषाचार्यों के अनुसार कब जलेगी होली?
शास्त्रानुसार यह सिद्धांत तो निर्विवाद रूप से सत्य है कि प्रबल-प्रारब्ध को केवल भोग कर ही नष्ट किया जा सकता है किंतु मन्द-प्रारब्ध के लिए हमारे शास्त्रों में कई ऐसे दुर्लभ और अचूक उपायों का वर्णन मिलता है जिससे साधक अपने जीवन की प्रतिकूलता में न्यूनाधिक कमी कर अनुकूलता प्राप्त कर सकते हैं।
इन उपायों का करने के शुद्ध व अभीष्ट मुहूर्त का होना अति-आवश्यकत होता है। शास्त्रानुसार होली, ग्रहण, दीपावली, रवि-पुष्य, गुरु-पुष्य, भौमवती अमावस्या ऐसे कुछ मुहूर्त है जिनमें इस प्रकार के उपायों की सफलता सुनिश्चित होती है। यह अत्यंत दुर्लभ संयोग है कि इस वर्ष चंद्रग्रहण और होली एक ही दिन हैं।
होली की रात्रि में कर्ज से मुक्ति और धन लाभ के लिए हम यहां 'वेबदुनिया' के सुधि पाठकों के लिए दो उपायों का उल्लेख कर रहे हैं जो पूर्ण विधि-विधान से करने पर साधक को अपने आर्थिक संकटों से मुक्ति पाने में सहायक सिद्ध होंगे।
उपाय 01- होली की रात्रि धनाकांक्षा रखने वाले साधक शास्त्रोक्त रीति से प्राप्त की हुई गूलर की जड़ को निम्न मंत्र से अभिमंत्रित कर यदि चांदी या सोने के ताबीज में धारण करते हैं तो वे अपने आर्थिक संकटों से मुक्ति प्राप्त कर धन लाभ प्राप्त कर सकते हैं।ALSO READ: Holika Dahan 2026: पूर्णिमा को है ग्रहण, कब करें होलिका दहन..!
उपर्युक्त मंत्र की कमलगट्टे की माला से 108 माला जप करने से गूलर की जड़ अभिमंत्रित होकर धनदायक हो जाती है। यह प्रयोग होली की रात्रि होलिका दहन के समय धनाकांक्षा रखने वाले साधक को स्वयं करना चाहिए।
जप से पूर्व स्नान कर शुद्ध व कोरे पीले वस्त्र धारण करें। गूलर की जड़ को नर्मदाजल या गंगाजल से धोकर साफ वस्त्र से पोंछकर उसे सिन्दूर से आवेष्टित करें। उसके उपरांत जप प्रारंभ करें। सम्पूर्ण जप की अवधि में गाय के घी का दीपक प्रज्वलित रहना आवश्यक है। साधक का आसन कम्बल का होना चाहिए। नैवेद्य के रूप में अनार का फल निवेदित करें। जप पूर्ण होने पर होलिका की प्रदक्षिणा कर उसमें एक श्रीफल भेंट कर गूलर की जड़ को उसी समय स्वर्ण या रजत ताबीज में भरकर धारण करें।
यह ताबीज धारण करने के कुछ ही समय पश्चात् साधक को धनलाभ होने लगता है। इस उपाय को करते समय में मन में पूर्ण श्रद्धा व धैर्य का होना आवश्यक है।
उपाय 02- होली की रात्रि नागदौन की जड़ अथवा नागकेसर को शहद में डुबाकर चांदी की डिब्बी में रखें और निम्न की मंत्र से 21000 जप करें। जप माला कमलगट्टे या शुद्ध स्फटिक की होना चाहिए। जप के उपरांत शेष विधि पूर्वोक्त प्रयोग की भांति ही करें। उसके पश्चात् इस अभिमंत्रित चांदी की डिब्बी को अपने तिजोरी, व्यापारिक स्थल में रखकर इसकी नित्य पूजा कर इसके सम्मुख श्रीसूक्त का पाठ करें। यह प्रयोग करने से साधक को कर्ज से मुक्ति प्राप्त होकर धन लाभ होता है।
मंत्र-!! श्रीं !!
(निवेदन- उपर्युक्त उल्लेखित प्रयोगों की सफलता साधक द्वारा किए गए पूर्ण विधि-विधान, श्रद्धा-विश्वास एवं धैर्य पर निर्भर करती है। अत: इन प्रयोगों को करते समय चिकित्सकीय परिणामों की अपेक्षा ना करें एवं इन प्रयोगों को सम्पन्न करने के विषय में पाठकगण अपने स्व-विवेक एवं श्रद्धा अनुसार निर्णय करें।)