गौरा देवी पब्लिक स्कूल के छात्रों ने जनक दीदी से सीखा प्रकृति प्रेम

WD Feature Desk

शनिवार, 24 जनवरी 2026 (15:40 IST)
गौरा देवी पब्लिक स्कूल, बडिया कीमा, इंदौर के छात्रों ने जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डवेलपमेंट पर आकर सेंटर की निदेशक, भारत सरकार द्वारा सम्मानित पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन के साथ रहकर रहकर साक्षात् प्रकृति दर्शन कर प्रकृति प्रेम सीखा। 
 
उन्होंने सूर्य, हवा, मिट्‍टी, पानी से प्रेम के ज्ञान को समझ कर इनके वैज्ञानिक लाभ देखें और समझें। उन्होंने पहली बार देखा सोलर से सूखे फल, फूल व सब्जी भाजी देखी ! सोलर–पवन उर्जा का पॉवर स्टेशन, सोलर वाटर हीटर देखा और समझा, घर में उपजाया जैविक भोजन, 10 प्रकार के सोलर कुकर और सोलर कुकिंग के तरीके सीखें।

आटोमेटिक सोलर डिश को देख हैरान हो गए। पानी रिचार्ज वाला तालाब और उसके इर्द गिर्द लगी हुई हल्दी, पालक, मेथी, तुवर की दाल, उगते हुए गेहूं-चने, फलदार पेड़ों को देख उनकी आंखों में चमक,  मुंह में पानी आ गया। यह सब उनके लिए प्रैक्टिकल था। 
 
सादगी व स्नेह के साथ विद्यार्थियों एवं सभी टीचर्स को दीदी ने प्रकृति दर्शन कराया तथा इसके बाद चर्चा के दौरान जनक दीदी ने अनेक प्रेरक विचार प्रस्तुत किए- सभी प्राणियों व पांच तत्वों में सद्भावना करने से ही जीवन में, सस्टेनेबल डेवलपमेंट होगी। भारत माता की जय, धरती माता की जय, गौ माता की जय बोलने से नहीं होगी, करने से ही होगी।
विज्ञान वही जो सृष्टि को बचाएगा, जीवन में तन, मन, धन व आत्मा में संतुलन बना कर रखना है। प्रकृति ने हमें बचाया है, हम प्रकृति पर हावी हो रहे है। संयम से रहना सीखना जरूरी है। मैं न तो कुछ बेचती हूं और न ही खरीदती हूं। मैं स्वतंत्र और खुश हूं, मैं संयम से प्राकृतिक संसाधनों से बनाये सस्टेनेबल प्रौद्योगिकियों के साथ सस्टेनेबल जीवन करने की अपनी प्रतिबद्धता से प्रकृति के पांच तत्वों के साथ सद्भाव में रहने का आनंद ले रही हूं। मुझे उनसे सबकुछ मिल रहा है।
 
जनक दीदी ने जीवन में संघर्ष और साहस के साथ प्रकृति से जुड़ने व प्रकृति से सच्चा प्रेम करने की प्रेरणास्पद बात कहीं, जो सबके अंतर्मन को स्पर्श कर गई। जीवन में जैविक उत्पादों व प्राकृतिक सौर ऊर्जा, वायु ऊर्जा व पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक महत्व योगदान तथा उचित उपयोग बताया।
 
गौरा देवी पब्लिक स्कूल के आचार्य धनराज सिंह ने आभार व्यक्त करते हुए कहा- "हमने और छात्रों ने यहां सब देख कर प्रकृति प्रेम सीखा है, सही व सार्थक जीवन जीने कला सीखी है। हम सबके लिए यह अनुपम व अविस्मरणीय रहेगा।''
 
रिपोर्ट- राज सिंह राजपूत

photo courtesy: Press release

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