चौहान शहर के ख्यात अभिभाषक है साथ ही लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। आपकी दो पुस्तकें 'संवेदनाओं का आचमन' और 'पत्थर पर बुवाई' प्रकाशित हुई हैं। मालवी बोली में भी आपकी लघुकथाओं का अनुवाद शहर की ख्यात शिक्षिका श्रीमती अर्चना ललित मंडलोई ने किया। इसके साथ ही आपकी लघुकथाओं का बंगाली, नेपाली, उड़िया, मराठी में अनुवाद हो रहा है।