Khamenei death story: अमेरिका और इसराइल ने शुरू में ही बता दिया था कि अयातुल्ला खामेनेई पर हमला सटीक गुप्तचरी पर आधारित था। मीडिया जांच से पता चलता है कि इसराइल और अमेरिका, ईरानी नेतृत्व की आंतरिक कार्यप्रणाली को कितनी गहराई से जानते थे।
शनिवार, 28 फरवरी की सुबह ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई पर हमला ईरानी नेतृत्व की समझ से परे था— एक विनाशकारी चूक था। उस दिन के बारे में धीरे-धीरे जो जानकारी अब तक सामने आई है, वह इसराइली गुप्तचर सेवा मोसाद और अमेरिकी गुप्तचर सेवा सीआईए द्वारा वर्षों की सावधानीपूर्वक तैयारी का परिणाम है।
ब्रिटेन के फाइनेंशियल टाइम्स और अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी ईरान पर टकटकी लगा रखी थी। दोनों देशों की गुप्तचर सेवाएं और दोनों नामी अख़बार न केवल अयातुल्ला अली खामेनेई की ही, बल्कि उनके अंगरक्षकों, ड्राइवरों और उच्च पदस्थ अधिकारियों की भी सारी गतिविधियों, आदतों और कार्य-कलापों की सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए काम कर रहे थे।
हर जगह जासूसी उपकरण
फाइनेंशियल टाइम्स (FT) की रिपोर्ट के अनुसार, कई साल पहले ही गुप्तचर एजेंसियों ने ईरानी राजधानी तेहरान की सड़कों और सार्वजनिक चौकों पर लगे लगभग सभी कैमरों को हैक करने में सफलता प्राप्त करली थी — यहां तक कि ईरानी नेताओं के कड़ी सुरक्षा वाले आवासों और भवनों के आसपास भी गोपनीय उपकरण आदि लगा दिए गए थे। इस तरह बड़ी मात्रा में डेटा एकत्रित किया और इसराइल भेजा गया। वहां उसका बारीकी से विश्लेषण किया गया। इस डेटा और अन्य स्रोतों से, ईरानी निर्णायकों और वहां के सत्ता-केंद्रों की एक अत्यंत जटिल तस्वीर सामने आई। फाइनेंशियल टाइम्स ने एक खुफिया अधिकारी के हवाले से लिखा, 'हम तेहरान को अपनी हथेली की तरह जानते थे।'
कहा जाता है कि इसमें सैन्य गुप्तचर एजेंसी अमन की 'सिग्नल यूनिट 8200' ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसकी तुलना कई बार अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी से की जाती है। यह एजेंसी मुख्य रूप से कोई काम शीघ्र सीखने वाले युवा कर्मियों की भर्ती से ही करती है। 2024 में, उस पर लेबनान में हिज़्बुल्लाह मिलिशिया के सैन्य नेतृत्व पर हमले की योजना में शामिल होने का आरोप लगा था। उस समय हज़ारों ऐसे पेजर (Pager), जिनमें विस्फोटक छिपाए गए थे, एक साथ फट गए। इससे उस समय हिज़्बुल्लाह के कई ऐसे सदस्य मारे गए, जो मानते थे कि पेजर उन्हें इसराइली निगरानी से बचा रहे हैं। पेजर एक छोटा-सा वायरलेस संचार उपकरण है, जिसका उपयोग संदेश भेजने और प्राप्त करने के लिए किया जाता है, उसे 'बीपर' भी कहते हैं।
लेबनानी हिज़्बुल्लाह के नेता नसरल्लाह का उदाहरण
2024 में इसराइली सेना ने लेबनानी हिज़्बुल्लाह संगठन के नेता नसरल्लाह को भी मार गिराया था, जो अपनी जान के लिए ख़तरे को भलीभांति जानता था और अपना अधिकांश समय भूमिगत बंकरों में ही बिताया करता था। उसकी मृत्यु इसराइली वायु सेना द्वारा उस इमारत पर टनों बम गिराने से हुई, जहां वह छिपा हुआ था।
किंतु, ईरान के नेता अयातुल्लाह खामेनेई के बारे में यह नहीं माना जाता था कि वे अपनी जान बचाने के लिए हमेशा भूमिगत आश्रयों में छिपे रहते हैं। इस बार इसराइली-अमेरिकी हमला शुरू होते ही उन्हें भूमिगत आश्रय में छिपना पड़ा और वहीं गिराए गए बमों से उनकी मृत्यु भी हुई। खामेनेई यह भी जानते थे कि इससे पहले, ईरानी परमाणु बम की योजना को ध्वस्त करने के लिए जून, 2025 में ईरानी परमाणु संयंत्रों और यूरेनियम भंडारों पर 12 दिनों तक जो हवाई हमले हुए, उनमें इसराइली और अमेरिकी वायु सेना लगभग एक दर्जन उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों को मारने में सफल रही थी।
खामेनेई अपने आधिकारिक आवास में बने शिकार
फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, एक अंदरूनी सूत्र के हवाले से कहा गया है कि खामेनेई यदि अपने किसी बंकर में ही रहते, तो इसराइली बमों का उन पर नगण्य प्रभाव पड़ता। ऐसे में, यह और भी आश्चर्यजनक बात है कि खामेनेई ने 28 फरवरी की सुबह, मध्य तेहरान के 'पाश्चर स्ट्रीट' स्थित अपने आधिकारिक आवास पर सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के कई प्रतिनिधियों को इकट्ठा किया था। येरूशलम पोस्ट में इसराइली पत्रकार बेन कास्पिट लिखते हैं कि खामेनेई ने नसरल्लाह जैसी ही गलती की, यानी इसराइल के संकल्प को कमतर आंका।
एक घातक चूक यह भी थी कि उस समय तक ईरानी नेतृत्व ने इजराइल और अमेरिका द्वारा हमले की आशंका नहीं जताई थी, क्योंकि उनके परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल शस्त्रागार पर वार्ता का एक और दौर अभी-अभी समाप्त हुआ था। खामेनेई ने संभवतः यह भी अनुमान लगाया होगा कि कोई भी हमला रात में होगा, सूर्योदय के बाद नहीं। निश्चित रूप से शनिवार को तो बिल्कुल ही नहीं, क्योंकि शनिवार यहूदियों का विश्राम दिवस, 'शबात' होता है। प्रमुख ईरानी नेताओं की 28 फरवरी वाली बैठक की जानकारी मिलते ही इसराइल और अमेरिका ने इस ग़लतफहमी का लाभ उठाने और 'शबात' के दिन ही हमला करने में कोई चूक नहीं की। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मुखबिरों का हवाला देते हुए बताया गया है कि कई ईरानी सूचना सूत्र, अमेरिकी गुप्तचर सेवा सीआईए से मिले हुए थे।
सबसे पहले हुआ 'साइबर हमला'
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रम्प द्वारा हमले का आदेश दिए जाने के बाद, अमेरिका ने ईरानी सेना की संचार और रक्षा क्षमताओं को कमज़ोर करने के लिए सबसे पहले 'साइबर हमला' शुरू किया। उसी समय, इसराइल ने खामेनेई के कार्यालयों के आसपास के लगभग एक दर्जन मोबाइल टावरों को निष्क्रिय कर दिया, जिससे वहां जमा हुए लोगों को आने वाले ख़तरे की कोई चेतावनी नहीं मिल सकी।
लड़ाकू विमानों ने 28 फरवरी वाली बैठक के भवन-परिसर पर 30 से अधिक मिसाइलें दागीं, जिनमें खामेनेई, उनके प्रति निजी तौर पर निष्ठावान क्रांतिकारी गार्ड के कमांडर मोहम्मद पाकपुर और राष्ट्रीय रक्षा परिषद के अध्यक्ष अली शमखानी मारे गए। खामेनेई के बेटे मुजतबा की पत्नी और बेटे भी मारे गए। बेन कास्पिट ने यरुशलम पोस्ट में लिखा कि यह अचानक हुआ हमला इतना अनोखा है कि आने वाले दशकों तक सैन्य अकादमियों के पाठ्यक्रम में एक विशिष्ट उदाहरण के तौर पर शामिल रहेगा।
मोजतबा भी अपने पिता की ही नकल हैं
अपने पिता की ही तरह कट्टरपंथी मोजतबा का नए तानाशाह के तौर पर चुनाव, यह दर्शाता है कि ईरान के अंध धार्मिक कट्टरपंथी अब भी आश्चर्यजनक रूप से सत्ता में मज़बूती से काबिज़ हैं। एक सप्ताह से अधिक अब तक चले युद्ध के बाद भी, जिसमें इसराइल और अमेरिका ने न केवल ईरान के सर्वोच्च नेता को मार गिराया, बल्कि वहां के सैन्य ठिकानों, सरकारी सुविधाओं और यहां तक कि उन इमारतों पर भी लगातार बमबारी की, जहां कथित 'विशेषज्ञों की सभा' की — यानी उत्तराधिकारी का चयन करने वाली संस्था की — बैठक होती है।
इस बैठक में 88 रूढ़िवादी धार्मिक विभूतियों ने, खामनेई के ही पुत्र मोजतबा को अपना और पूरे देश का नया नेता चुना है। उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को चुना है, जो निर्मम कट्टरता दिखाने में अपने पिता से रत्ती भर भी कम नहीं है। जनता के बीच सबसे अधिक घृणित 'क्रांतिकारी गार्ड' से मोजतबा के सबसे घनिष्ठ संबंध हैं। 'क्रांतिकारी गार्ड' वास्तव में किसी सेना की तरह का एक आतंकवादी सैन्य संगठन है, जो आलोचकों को सताता है और जनता के विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचल देता है।
अर्ध-राजशाही जैसी स्थिति
मोजतबा का चुनाव यह भी दर्शाता है कि ईरानी प्रशासन पहले से कहीं अधिक दबाव में है। मोजतबा को उत्तराधिकारी बनाने की घोषणा वास्तव में उसके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद ही होनी थी। अंतिम संस्कार, हालांकि अभी तक नहीं हुआ है; संभवतः इसलिए, क्योंकि वह इसराइली और अमेरिकी सेनाओं का निशाना बन सकता था। लेकिन, लगता है कि ईरानी प्रशासन अब और इंतजार नहीं करना चाहता। वह देश में 'सामान्य स्थिति' का दिखावा बनाए रखना चाहता है, भले ही देश अब भी अमेरिकी-इसराइली धुंआधार बमबारी की आग की लपटों से घिरा हुआ है। पिता के उत्तराधिकारी के तौर पर पुत्र का चयन एक वंशानुगत राजशाही के समान है, जिसे वास्तव में 1979 की ईरानी इस्लामी क्रांति ने समाप्त कर देने का लक्ष्य रखा था।
आने वाले दिनों और सप्ताहों में सबसे बड़ा प्रश्न यह होगा कि ईरान में कट्टरता की नई मूर्ति मोजतबा खामेनेई, अपने कर्तव्यों का निर्वहन कैसे करेंगे। ख़ासकर तब, जब उनके कट्टर शत्रुओं इसराइल और अमेरिका ने उनके माता-पिता, उनकी बहन और उसके परिवार का सफ़ाया कर दिया है। इसराइल पहले ही घोषणा कर चुका है कि वह हर उत्तराधिकारी को निशाना बनाएगा। इसराइल ने अपने लगभग हर दुश्मन का कभी-न-कभी सफ़ाया कर ही दिया है। इसलिए, ईरान के सर्वोच्च नेता के तौर पर मोजतबा की नियुक्ति उनके लिए एक तरह से मौत की सज़ा के समान भी है।