आतंक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में दोहरा मापदंड ना हो : सुमित्रा महाजन

बुधवार, 12 जुलाई 2017 (18:29 IST)
मास्को। लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने रुस की संसद दूमा को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवादी नेटवर्कों को पुरी तबाह करने और सीमापार से आतंक की घुसपैठ को रोकने के लिए सभी को कार्य करना होगा। 
 
श्रीमती महाजन ने कहा कि आतंकवाद ने वैश्विक स्वरुप ले लिया है। आतंक के बढ़ते खतरे के कारण यह आवश्यक है कि पूरा विश्व बिना दोहरा मानदंड अपनाए निर्णायक और सामूहिक रूप से इसे परास्त करने के लिए एकजुट हो जाए। श्रीमती महाजन इस समय भारतीय संसदीय शिष्टमंडल का नेतृत्व कर रही हैं।
 
रुस की संसद दूमा को संबोधित करते हुए श्रीमती सुमित्रा महाजन
रुस की संसद में उन्होंने कहा की इस वर्ष हम भारत और रूसी संघ के राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगाँठ मना रहें है। दूमा के भव्य भवन में प्रवेश करते भारतीय संसदीय शिष्टमंडल को इस महान देश के गौरवपूर्ण इतिहास और हमारे बीच गहरे संबंधों की झलक मिल गई। 
 
भारत और रूसी गणराज्य के बीच इस चिरकालीन मित्रता को उन्होंने संस्कृत श्लोक से स्मरण किया। श्लोक का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि जो सुख, दुःख, अकाल, उपद्रव, युद्ध के समय, राजा के दरबार में और श्मशान में भी साथ देता है, वही सच्चा मित्र होता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक तेजी से बढ रही है। भारत ने जीएसटी के रूप में सबसे बड़े आर्थिक सुधार को आरम्भ किया है। 
उन्होंने रुस भारत संबंधो पर जोर देकर कहा कि दोनों देशों की एनर्जी ब्रिज बनाने की महत्वाकांक्षी योजना है। अंतरराष्ट्रीय नार्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसे नए क्षेत्रे को खोलने, ग्रीन कॉरिडोर की स्थापना करने तथा दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं जनता में आपसी मेलजोल को सुगम बनाने के लिए कार्यवाही को तेज करने की आवश्यकता है।
 
श्रीमती महाजन ने कहा भारतीय सांसदों जैसे निर्वाचित रुसी संद्य के डेप्युटी संसद सदस्य लोगों की आकांक्षाओं को मुखर करते हैं। इस बात पर खुशी व्यक्त की कि स्टेट दूमा में भारत संबंध संसदीय मैत्री समूह का गठन किया गया और घोषणा की कि भारतीय संसद में भी इसी प्रकार के मैत्री समूह का गठन किया गया है। 
 
उन्होंने इस बात का आह्वान किया कि रूसी संघ की राज्य विधानमंडलों विधान सभाओं और भारत के राज्यों के बीच, संसदीय सहयोग का और विस्तार करना चाहिए। हमें द्विपक्षीय मोर्चे पर यह देखने की आवश्यकता है कि किस तरह हमारे दोनों देशों की संसद, हमारी सरकारों के नीतिगत निर्णय तथा हस्ताक्षरित समझौतों को आगे ले जाने में सहायता कर सकती है।
 
श्रीमती महाजन ने भारत और रूसी संघ के रक्षा संबंधों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि आज यह संबंध क्रेता-विक्रेता के संबंध तक ही सीमित न रहकर गहरे और दोस्ताना हो गए हैं। भारत और रूसी संघ संयुक्त राष्ट्र और विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में सुधार की आवश्यकता के बारे में सहमत हैं, जिससे यह संस्था मौजूदा चुनौतियों और खतरों का और अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर सके। उन्होंने एक बार फिर विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए पुरजोर समर्थन करने के लिए रूसी संघ को धन्यवाद दिया।
 
इससे पहले श्रीमती महाजन ने रूसी संघ की स्टेट दूमा के स्पीकर, श्री व्याचेस्लाव वोलोदिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों देशों की संसदों के बीच सहयोग बढ़ाने, युवा सांसदों को भारत में शुरू किए गए नए अध्यक्षीय शोध कदम के अंतर्गत संवाद करने के साथ साथ सतत संपर्क और समनवय पर बल दिया। 
 
स्टेट दूमा के स्पीकर वोलोदिन ने हाल ही में अनंतनाग में हुए आतंकवादी हमले दूमा के डेपुटीज की ओर से संवेदना व्यक्त की। श्रीमती महाजन ने रूसी संघ की फेडरल असेंबली की फेडरल कौंसिल की चेयरपर्सन, श्रीमती वैलेंटिना मत्वियेंको के साथ भी मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की।
 
भारत-रूस अंतर-संसदीय आयोग की चौथी में व्यापार, आर्थिक, सांस्कृतिक सहयोग, विशिष्ट सामरिक भागीदारी के क्षेत्रों में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सुगम बनाने में सांसदों की भूमिका, ब्रिक्स और एससीओ पर संसदीय विचार-विमर्श, क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा, के साथ साथ बहुपक्षीय मंचों पर आतंकवाद और अतिवाद के विरुद्ध संघर्ष करना आदि विषय शामिल रहें। लोकसभा अध्यक्ष के भाषण के दौरान रुसी सांसदों ने कईं बार करतल ध्वनि से और अपने स्थान पर खड़े रहकर अभिवादन किया।

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