बाल गीत : बरसात आई...

- राजा चौरसिया


 
ये झुंड बादलों के
देने लगे दिखाई,
पानी लगा बरसने
बरसात अहा आई।
 
रिमझिम, झड़ी या टप-टप
सड़कों पे कहीं छप-छप
सोंधी महक से धरती
फूली नहीं समाई।
 
चलती हवाएं ठंडी
खुशियों की हरी झंडी
परदे में छिपा सूरज
गरमी की है विदाई
 
सब ताल, नदी, जंगल
तरु भी मनाएं मंगल
मोरों ने नाच करके
बांकी छटा दिखाई। 
 
साभार- देवपुत्र 



 

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