Planets Rahu and Ketu: कलयुग में राहु, केतु, शनि और शुक्र का प्रभाव सर्वाधिक है, जिसमें राहु को 'कलयुग का राजा' माना गया है। यह अचानक होने वाली घटनाओं, युद्ध, सफलता और असफलता का मुख्य कारक है। राहु कल्पना शक्ति, नए विचार और भ्रम का प्रतीक है। शरीर में यह सिर की चोटी और ठोड़ी पर प्रभाव डालता है, जबकि घर में इसका स्थान सीढ़ियां, टॉयलेट और इलेक्ट्रॉनिक सामान हैं।
द्वितीय भाव: दोरंगा या बहुचर्चित कंबल दान करें।
तृतीय भाव: बाएं हाथ की कनिष्ठा उंगली में सोने का छल्ला पहनें।
चतुर्थ भाव: चांदी की डिब्बी में शहद भरकर घर के बाहर जमीन में दबाएं।
पंचम भाव: घर में चांदी का ठोस हाथी रखें।
षष्ठ भाव: बहन की सेवा करें और कुत्ता पालें।
सप्तम भाव: लाल रंग की लोहे की गोली पास रखें या चांदी की डिब्बी में गंगाजल और चांदी का टुकड़ा रखें।
अष्टम भाव: 800 ग्राम सिक्कों के आठ टुकड़े करके बहते पानी में बहाएं।
नवम भाव: चने की दाल जल में प्रवाहित करें और घर में चांदी की ईंट रखें।
दशम भाव: पीतल के बर्तन में नदी का जल भरकर उस पर चांदी का ढक्कन लगाकर घर में रखें।
एकादश भाव: 400 ग्राम सिक्के के टुकड़े जल में बहाएं और सिरहाने मूली रखकर सुबह दान करें।