कितनी कामयाब है जर्मनी की बोतल जमा स्कीम

DW

शनिवार, 20 नवंबर 2021 (21:05 IST)
जर्मन उपभोक्ता बड़ी शिद्दत से अपनी इस्तेमाल की हुई बोतलें लौटा देते हैं। जर्मनी में बोतल जमा करने की योजना भला कैसे काम करती है? क्या ये मॉडल दूसरे देश भी अपना सकते हैं? शनिवार की सुबह है और जर्मनी के शहर कोलोन के एक सुपर बाजार में लोग बोतलों और डिब्बों से भरे झोले लिए कतार में लगे हैं। लेकिन वे यहां कुछ खरीदने नहीं बल्कि उन्हें लौटाने आए हैं।

प्रक्रिया आसान है। जब वो अपने सॉफ्ट ड्रिंक खरीदते हैं, तो दुकानदारों को उसकी कीमत के साथ एक निश्चित डिपॉजिट का भुगतान भी करते हैं। जर्मन भाषा में इसे कहा जाता है फांड यान जमा राशि। जब उपभोक्ता अपनी बोतलें और डिब्बे, स्टोर को लौटाते हैं, तो उन्हें अपना पैसा वापस मिल जाता है।

एनवायरन्मेंटल एक्शन जर्मनी (डीयूएच) नाम के एक एनजीओ में चक्रीय अर्थव्यवस्था का काम देखने वाले टॉमस फिशर ने डीडब्ल्यू को बताया, 2003 से पहले, करीब तीन अरब डिस्पोजेबल बोतलें और डिब्बे, हर साल पर्यावरण में फेंक दिए जाते थे। लेकिन इन दिनों, जर्मनी को इस बात का गर्व है कि इस डिस्पोजेबल सामग्री की वापसी की दर 98 प्रतिशत है। फिशर कहते हैं, अब इससे ज्यादा ऊंची दर मिल पाना नामुमकिन है।

जर्मनी की फांड प्रणाली में दो किस्म की बोतलें आती हैं। पहली वे जिनमें उत्पादक की निर्धारित की हुई डिपॉजिट राशि होती है, आठ यूरो सेंट से लेकर 25 यूरो सेंट तक। और उन्हें कई कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है और वे कांच या पीईटी प्लास्टिक की बनी होती हैं।

दूसरी किस्म के तहत, सिर्फ एकबारगी इस्तेमाल के डिब्बे या कंटेनर आते हैं और फिर उन्हें रिसाइकिल कर दिया जाता है। इन पर डिपॉजिट सरकार निर्धारित करती है और वो है 25 यूरो सेंट। उपभोक्ताओं के लिए फांड सिस्टम यूं तो खाली बोतलों को एक मशीन में डालना भर है लेकिन उसके बाद जो होता है वो प्रक्रिया जरा पेचीदा है।

बोतलों का रोमांचकारी सफर
जब कोई रीफिल हो सकने वाली बोतल, मान लीजिए कोला की बोतल, सुपर मार्केट में लौटाई जाती है तो उसके साथ ही शुरू होता है उसका एक लंबा सफर। पेय पदार्थ का थोक विक्रेता ऐसी बहुत सारी खाली बोतलों को ट्रक में भरकर छंटाई केंद्र तक ले जाता है जहां उसे उसी आकार की दूसरी बोतलों के साथ रखा जाता है। इसके बाद उसी किस्म की बोतल का उपयोग करने वाले उत्पादकों के पास वो बोतल पहुंचाई जाती है। वहां उसे साफ किया जाता है, दोबारा नया माल भरा जाता है और फिर से बेचने के लिए दुकान में उपलब्ध करा दिया जाता है।

जर्मन पर्यावरण एजेंसी (यूबीए) के मुताबिक ऐसी एक कांच की बोतल को गुणवत्ता में गिरावट आए बिना 50 बार भरा जा सकता है। दोबारा इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक बोतलों की रीफिल दर 25 की होती है यानी 25 दफे इस्तेमाल हो सकती हैं। लेकिन सिंगल यूज वाली बोतलों का रास्ता अलग होता है। स्टोर से उन्हें इकट्ठा करने के बाद उन्हें रिसाइकलिंग प्लांट को रवाना कर दिया जाता है। जहां उनके टुकड़े-टुकड़े कर और उनकी गिट्टियां बना दी जाती हैं और उनसे फिर नई प्लास्टिक बोतलें, कपड़ा या दूसरा सामान बनता है जैसे डिटर्जेंट के डिब्बे।

पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प क्या
दोबारा इस्तेमाल और एकबारगी इस्तेमाल वाली बोतलों की जमा प्रणाली से कच्चे माल, ऊर्जा और सीओटू उत्सर्जन की बचत होती है। मुख्यतः इसलिए क्योंकि नई बोतलों को बनाने में फॉसिल ईंधन की खपत कम हो जाती है, ये कहना है यूबीए में कार्यरत पैकेजिंग के विशेषज्ञ गेरहार्ड कोश्चिक का और मिलेजुले प्लास्टिक वाले झोले से उलट, सिंगल यूज बोतलों को रिसाइकिल कर उनमें खाद्य स्तर की सामग्री भरी जा सकती है। इस आधार पर डिस्काउंट वाले सुपर बाजार जैसे आल्डी और लीडल ज्यादातर सिंगल यूज कंटेनर बेचते हैं। उनका दावा है कि उनकी रिसाइकलिंग गतिविधियां पर्यावरण के लिए अच्छी हैं।

लीडल के प्रवक्ता ने डीडब्ल्यू को बताया, कुछ साल पहले जो स्थिति थी उसकी तुलना में हम 70 फीसदी कम पीईटी सामग्री इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे सिंगल यूज सामान की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है। कोका-कोला जर्मनी में सस्टेनेबिलिटी विभाग की प्रमुख उवे क्लाइनर्ट ने डीडब्ल्यू को बताया, प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए जरूरी है कि हमें अपने ड्रिंक्स डिस्काउंट वाले स्टोरों में रखने होंगे।

कोका कोला कंपनी में दोबारा इस्तेमाल होने वाली बोतलों की खपत 2015 में 56 फीसदी से गिरकर 42 फीसदी रह गई थी। प्लास्टिक कचरे में कमी लाने के लिए प्रयासरत एनजीओ के एक समूह ब्रेक फ्री फ्रॉम प्लास्टिक के मुताबिक दुनिया के सबसे बड़े प्लास्टिक प्रदूषकों में पेप्सिको के साथ साथ कोका कोला का नाम भी आता है। वैसे जर्मनी में कोका कोला के पेय दोबारा इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक बोतलों में आते हैं और कुछ कांच की बोतलों में।

डिस्काउंट देने वाला लीडल स्टोर श्वार्त्स ग्रुप का है। अपने उत्पादों के लिए वो अब सिंगल यूज बोतलें बनाता है। कंपनी के मुताबिक, वो रिसाइकिल की हुई पीईटी सामग्री इस्तेमाल करती है। सिर्फ लेबल और ढक्कन ही 100 फीसदी रिसाइकिल प्लास्टिक के नहीं बने होते हैं। वैसे पर्यावरणविदों का कहना है कि फिर से इस्तेमाल होने वाली बोतलें सिंगल यूज़ पैकेजिंग के मुकाबले ज्यादा पर्यावरण अनुकूल होती हैं।

डीयूएच के मुताबिक 100 प्रतिशत रिसाइकिल सामग्री से बनी सिंगल यूज प्लास्टिक बोतलें बाजार में अपेक्षाकृत रूप से कम ही हैं। इसके अलावा, डीयूएच के मुताबिक हर रिसाइकलिंग में सामग्री भी बर्बाद होती है। ऐसा कोई करीबी लूप नहीं है जिसमें सामग्री की खूबियों में गिरावट आए बगैर उसे अनिश्चित समय के लिए एक नए उत्पाद में बदला जा सके। इनमें से कई बोतलों के उत्पादन में जीवाश्म ईंधनों से मिलने वाले कच्चे माल की जरूरत होती है। फिशर कहते हैं, जर्मनी में सिंगल यूज वाली पीईटी बोतलों में औसतन, 26 प्रतिशत रिसाइकिल सामग्री होती है।

इसके अलावा, यूबीए के गेरहार्ड कोश्चिक के मुताबिक दोबारा इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक बोतलों को दोबारा इस्तेमाल होने वाले पीईटी दानों में तोड़ा जा सकता है। ऐसा तब होता है जब बोतल को रीफिल करने की मियाद पूरी हो जाती है यानी जब उसे मौलिक रूप में दोबारा इस्तेमाल करना और संभव नहीं रह जाता।

कोश्चिक ने डीडब्ल्यू को बताया, हम लोग हमेशा इसी क्षेत्र से दोबारा इस्तेमाल होने वाले कंटेनर खरीदने की सिफारिश करते हैं। वो कहते हैं कि रिसाइकलिंग का विकल्प सबसे सही तभी होता है जब बोतल को दोबारा भरना मुमकिन नहीं रह जाता। वैसे ज्यादा अच्छा तो ये है कि कचरे से परहेज ही रखा जाए।

लेबल लगाने में झंझट और दुविधा
सिंगल यूज बोतलों से अलग री यूज होने वाली बोतलों के लिए कोई अनिवार्य समान चिन्ह नहीं है और लेबलिंग अलग-अलग हो सकती है। जिसमें वापसी लायक बोतल, जमा होने वाली बोतल, वापस होने लायक या दोबारा इस्तेमाल लायक बोतल जैसी शब्दावलियां डाली जा सकती हैं।

खुदरा विक्रेताओं को ये निशान लगाना होता है कि उनके स्टोर में उपलब्ध बोतलें क्या एक बार या कई बार इस्तेमाल वाली हैं। लेकिन दुकान या सुपर बाजार में बिकने वाली एक बार इस्तेमाल की बोतलों के लिए अकेला इन-स्टोर चिन्ह ही काफी माना जाता है। जर्मन एनजीओ, प्रकृति और जैवविविधता संरक्षण संघ (एनएबीयू) जैसे पर्यावरण संगठन इसे नाकाफी बताते हुए इसकी आलोचना करते हैं।

हाल के एक सर्वे के मुताबिक, जर्मनी में अधिकांश उपभोक्ता अब ये पहचानने लगे हैं कि बोतल सिंगल यूज वाली है या मल्टी यूज वाली, लेकिन 42 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो अब भी ये सोचते हैं कि तमाम डिपॉजिट बोतलें, जिनमें सिंगल यूज वाली भी शामिल होती हैं, सब की सब दोबारा भरी जाती हैं।

जमा-वापसी प्रणाली से किसका फायदा?
सिंगल यूज़ वाली बोतलें बेचने वाले स्टोर, दोबारा इस्तेमाल होने वाली चीजों से जुड़ी लॉजिस्टिक लागतों से बचते हैं। उन्हें रिसाइकलिंग से भी फायदा होता है और उच्च स्तर वाले पीईटी की आगे की बिक्री से भी। क्लाइनर्ट कहती हैं, आपको रिसाइकिल किए हुए पीईटी के लिए तेल से बने कच्चे पीईटी की तुलना में ज्यादा भुगतान करना होगा। लेकिन पर्यावरण लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ये जरूरी है।

ये बिजनेस इतना आकर्षक हो चला है कि सुपर बाजार चेन लीडल ने तो अपना रिसाइकलिंग ग्रुप ही बना डाला है। फिशर कहते हैं, डिस्काउंट स्टोरों के लिए हर बोतल एक तोहफा है। यहां तक कि जो बोतलें लौटाई न जा सकीं हों, चाहे रीफिल हो चाहे सिंगल यूज़ बोतल हो, उन स्टोरों के लिए खूब मुनाफा जुटाती हैं जो उन्हें बेचते हैं। हर साल जर्मन पेय बाजार में 16.4 अरब एकल उपयोग वाली बोतलों की भरमार हो जाती है और उनमें से वापस न होने वाली डेढ़ फीसदी बोतलें भी खुदरा विक्रेताओं को 18 करोड़ यूरो तक का मुनाफा कमा कर देती हैं।

दूसरे देशों के लिए मॉडल?
जर्मनी की सरकारी पर्यावरण एजेंसी यूबीए कहती है कि सभी देशों के लिए एक ही गोली अचूक नहीं हो सकती है। हर संदर्भ में बारीकी से जांच-परख कर ही बताया जा सकता है कि कौनसा तरीका कहां के लिए उपयुक्त या सबसे सही होगा। लेकिन लंबे समय से डिपॉजिट प्रणालियों का विरोध करती आ रही बड़ी कंपनियों के रवैए में भी बदलाव आने लगा है।

कोका कोला यूरोप के पब्लिक पॉलिसी सेंटर के वरिष्ठ निदेशक वाउटर फरम्युलेन ने डीडब्ल्यू को ईमेल से बताया कि पूरे यूरोप में जहां कोई भी प्रमाणित कामयाब विकल्प उपलब्ध नहीं हैं, वहां हम एक सुव्यवस्थित, उद्योग-स्वामित्व वाली जमा वापसी योजनाओं का समर्थन करते हैं।

बॉटल डिपॉजिट स्कीमों का समर्थन करने वाले स्पेनी एनजीओ रिटोर्ना के प्रवक्ता सीजर सांचेज मानते हैं कि सामाजिक दबाव और एकल उपयोग वाले प्लास्टिक पर पहले से कड़े यूरोपीय कानून के दबाव में कंपनियों का रवैया बदला है। इस कानून के मुताबिक 2029 तक 90 प्रतिशत प्लास्टिक बोतलों को रिसाइकिल वास्ते अलग-अलग इकट्ठा करना होगा। वो कहते हैं, समाज समाधान चाहता है और मेरा मानना है कि डिपॉजिट वाली स्कीम स्पेन समेत दूसरे देशों में जल्द ही लागू होगी।

जर्मनी में भी पर्यावरण समूह जमा स्कीम को सभी किस्म के कांच और टेट्रा पैक्स जैसी कार्टन पैकेजिंग के लिए लागू करने पर जोर डाल रहे हैं। फिशर कहते हैं, इन डिब्बों का इस्तेमाल जैम या शहद रखने के लिए भी संभव हो सकेगा। तमाम उत्पाद फिर से इस्तेमाल हो सकते हैं, और हम यही चाहते हैं।
रिपोर्ट : इरीने बानोस रुइज

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