Russia-Ukraine War: यूक्रेन में युद्ध अपराध हुआ है इसका पता कैसे चलेगा

DW

शुक्रवार, 4 मार्च 2022 (08:37 IST)
रिपोर्ट: मोनिर गाएदी
 
अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत यानी आईसीसी ने यूक्रेन में संभावित युद्ध अपराध के खिलाफ जांच करने का एलान किया है। युद्ध अपराधों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तय किए गए हैं। आखिर कैसे पता चलता है कि युद्ध अपराध हुआ है?
 
रूस के सैनिक यूक्रेन में लगातार हवाई हमले और टैंकों से नागरिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। इन हमलों ने युद्ध अपराध की आशंका पैदा कर दी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि रूसी सेना यूक्रेन में 'अविवेकपूर्ण हमले' कर रही है।
 
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने नागरिक इलाकों में रूस के मिसाइल हमले को युद्ध अपराध कहा है। मंगलवार को रूसी सेना ने खारकीव के फ्रीडम स्क्वेयर पर हवाई हमला किया। बुधवार को भी टीवी टावर और कई रिहायशी इमारतों पर बमबारी हुई। इनमें कई लोगों की जान भी गई है। अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत आईसीसी ने कहा है कि वो युद्ध अपराध की आशंकाओं को खंगालने के लिए जांच शुरू करने जा रहे हैं। बुधवार को एक बयान में अभियोजक करीम एए खान ने कहा है कि जांच शुरू करने के लिए 'उचित आधार' मौजूद हैं और सबूतों को जमा करने का काम शुरू कर दिया गया है।
 
युद्ध के नियम
 
युद्ध अपराधों के लिए खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय मानक तय किए गए हैं और इन्हें मानवता के खिलाफ अपराध से बिल्कुल अलग रखा गया है। किसी जंग के दौरान मानवता से जुड़े नियमों के गंभीर उल्लंघन के रूप में युद्ध अपराध की परिभाषा दी गई है। रोम स्टेच्यू ऑफ द इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के तरफ से दी गई यह परिभाषा 1949 की जिनेवा कंवेंशन से निकली थी। इसका विचार यहां से आया कि किसी इंसान को सरकार या किसी देश की सेना की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
 
नरसंहार की रोकथाम करने वाला संयुक्त राष्ट्र का विभाग युद्ध अपराध को नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध से अलग कर के देखता है। युद्ध अपराध किसी घरेलू संघर्ष या फिर दो देशों के बीच हो सकते हैं, जबकि नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध शांति काल में या फिर सेना की किसी समूह या निहत्थे लोगों पर की गई कार्रवाई होती है।
 
उन गतिविधियों की एक लंबी सूची है जिन्हें युद्ध अपराध माना जाता है। इसमें लोगों को बंधक बनाना, जानबूझ कर हत्या करना, प्रताड़ना या फिर युद्ध बंदियों के साथ अमानवीय व्यवहार और बच्चों को युद्ध में जाने पर विवश करना भी शामिल है। हालांकि व्यवहार में बहुत कुछ ऐसा है जहां पर युद्ध अपराध की परिभाषा धुंधली पड़ जाती है।
 
टोरोंटो यूनिवर्सिटी के मंक स्कूल ऑफ ग्लोबल अफेयर्स एंड पब्लिक पॉलिसी के मार्क केर्स्टन कहते हैं, 'युद्ध के कानून अकसर आम लोगों की मौत नहीं रोक पाते हैं। हर आम नागरिक की मौत अनिवार्य रूप से गैरकानूनी नहीं है।' शहरों या गांवों पर हमला, आवासीय परिसरों या स्कूलों पर बमबारी यहां तक कि नागरिक समूहों की हत्या भी अनिवार्य रूप से युद्ध अपराध नहीं है, अगर उनकी सेना की जरूरतों के हिसाब से यह उचित हो। यही काम युद्ध अपराध हो जाएंगे अगर इसका नतीजा बेवजह के विध्वंस, पीड़ा और मौत तो हो मगर सेना को उस हमले का फायदा न मिले।
 
किसी आदमी ने या फिर सेना ने युद्ध अपराध किया है या नहीं यह पता लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून ने तीन सिद्धांत दिए हैं: अंतर, समानता और सावधानी। समानता सेनाओं को किसी हमले का जवाब अत्यधिक हिंसा से देने से रोकती है। केर्स्टन ने डीडब्ल्यू से कहा, 'उदाहरण के लिए अगर एक सैनिक मरता है तो आप जवाबी कार्रवाई में पूरे शहर पर बम नहीं गिरा सकते।'
 
अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस कमेटी के मुताबिक उन चीजों को भी निशाना बनाने की मनाही है जिनसे, 'संयोगवश आम लोगों की जान गई हो, आम लोग घायल हुए हो या फिर किसी नागरिक सामान को नुकसान हुआ हो और जो सेना को संभावित फायदा मिलने के लिहाज से अत्यधिक सीधी और ठोस कार्रवाई हो।'
 
सावधानी के लिए जरूरी है कि सभी पक्ष संघर्ष को पूरी तरह से टालें या फिर आम लोगों को होने वाला नुकसान कम से कम रखें। केर्स्टेन का कहना है कि आखिरकार, 'अंतर का सिद्धांत यह कहता है कि आपको लगातार नागरिक, युद्धरत आबादी और चीजों में अंतर करना है।' इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह काम मुश्किल हो सकता है, 'उदाहरण के लिए ऐसे बैरक पर हमला करना जहां लोग हों और वो कहें कि युद्ध में हिस्सा नहीं ले रहे हैं तो यह युद्ध अपराध होगा। इसी तरह से किसी ऐसे सैन्य अड्डे को निशाना बनाया जहां रखे जेनरेटर अस्पताल को बिजली देते हों।'
 
आम लोगों और सैनिकों के बीच फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। केर्स्टन का कहना है, 'देशद्रोही होते हैं, सादे कपड़ों में अधिकारी होते हैं, हमला करने वाले जंग में हर वक्त खुद को छिपाए रखते हैं, ये सब बहुत सामान्य सी चालें हैं।'
 
समय से मुकाबला
 
जब आईसीसी अभियोजकों के पास यह मानने के लिए वजहें होती हैं कि युद्ध अपराध हुआ है तो वे सबूत ढूंढने के लिए जांच शुरू करते हैं। इसके जरिए उन खास बिंदुओं की तलाश की जाती है जिनसे किसी व्यक्ति को उस अपराध का दोषी ठहराया जा सके। केर्स्टन का कहना है, 'यूक्रेन के युद्ध में हुए अपराधों के लिए ये वही पल हैं जिनकी ओर हम बढ़ रहे हैं।'
 
तेजी बहुत जरूरी है नहीं तो सबूत बिगड़ जाएंगे या फिर खत्म हो जाएंगे। अभियोजकों के लिए ऐसे संदिग्ध अपराधों की सफल जांच करना और मुश्किल हो जाता है जब संघर्ष में एक पक्ष ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ की हो या फिर गवाह मौजूद न हों।

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