दतिया में उपचुनाव होने पर कितनी आसान होगी नरोत्तम मिश्रा की राह, कांग्रेस ने शुरु की घेराबंंदी?

भोपाल ब्यूरो

शनिवार, 4 अप्रैल 2026 (15:16 IST)
दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट से दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एफडी धोखाधड़ी मामले में तीन साल की सजा मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी विधायकी खत्म कर दी है। विधानसभ सचिवालय की ओर से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने का आदेश जारी करने के बाद अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग पर टिक गई है। अगर चुनाव आयोग ने विधानसभा सचिवालय के आदेश पर अमल कर दतिया सीट को रिक्त घोषित कर देता  है तो दतिया में पहली बार उपचुनाव  का रास्ता साफ हो जाएगा। चुनाव आयोग के सीट रिक्त घोषित करने  के 6 महीने के अंदर दतिया में उपचुनाव होगा।

अगर दतिया में उपचुनाव होता है, तो इस बार मुकाबला भी काफी दिलचस्प होगा। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती से मात खाने वाले भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोतत्तम मिश्रा जिस अंदाज में दतिया में सक्रिय रहे, उससे यह करीफ तय है कि नरोतम मिश्रा ही भाजपा के उम्मीदवार होंगे। वहीं अगर कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को हाईकोर्ट से सजा पर स्टे नहीं मिलता है तो वह विधायकी खत्म होने के साथ चुनावी रेस में भी बाहर हो जाएंगे। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि नरोत्तम मिश्रा के सामने कांग्रेस किस चेहरे को चुनावी मैदान में उतारेगी।

कांग्रेस के संभावित चेहरे में सबसे बड़ा नाम अवधेश नायक का है। भाजपा से कांग्रेस में गए अवधेश नायक को 2023 के विधानसभा चुनाव में पहले कांग्रेस ने अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया था लेकिन टिकट के एलान के बाद जिस तरह से दतिया से भोपाल तक स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं और राजेंद्र भारती के समर्थकों ने हंगामा किया था, उससे पार्टी को अपना फैसले बदलने को मजबूर होना प़ड़ा था और अवधेश नायक की जगह राजेंद्र भारती को चुनावी मैदान में उतार गया। वहीं अब जब एक बार फिर दतिया में उपचुनाव की संभावना बन गई है, तब अवधेश नायक के नाम फिर सुर्खियों में आ गया है।

अवधेश नायक भी नरोत्तम मिश्रा की तरह ब्राह्मण समुदाय से आते है, जो दतिया के जातीय समीकरण के हिसाब से एकदम फिट बैठता है। दतिया विधानसभा सीट के जाति समीकरण की बात करें तो यहां पर ब्राह्मण समुदाय अहम प्रभाव रखते हैं,विधानसभा सीट पर 35 हजार से अधिक ब्राह्मण मतदाता हैं जो चुनाव में निर्णायक भूमिका अदा करते है।

नरोत्तम मिश्रा के सामने सबसे बड़ी चुनौती कुशवाह वोटरों को साधने की है। सीट पर कुशवाह वोटरों की संख्या 30 हजार से उपर है। बताया जाता है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कुशवाह वर्ग की नाराजगी का खामियाजा ही नरोत्तम मिश्रा को उठाना पड़ा था और वह चुनाव हार गए थे। चुनाव के बाद कुशवाह वर्ग को साधने के लिए नरोत्तम मिश्रा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कुशवाह वर्ग से आने वाले रघुवीर कुशवाह को भाजपा जिला अध्यक्ष बनवाया।

हलांकि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती पर कोर्ट के फैसले से ठीक पहले दतिया के वार्ड एक से भाजपा पार्षद कल्लू कुशवाह की दिनदहाड़े बीच चौराहे पर हत्या ने एक बार दतिया के जातिगत समीकरण को उलझा दिया है। भाजपा पार्षद कल्लू कुशवाह की हत्या के बाद अब कांग्रेस एक बार अक्रामक होती दिख रही है। शिवपुरी को पिछोर से कांग्रेस विधायक कैलाश कुशवाह का भाजपा पार्षद कल्लू कुशवाह के घर पहुंचकर उनको श्रद्धांजलि देने के पीछे भी कांग्रेस का सियासी दांव माना जा रहा है।

ऐसे में अगर दतिया में अगर उपचुनाव होता है तो एक बार फिर चुनावी मुकाबला काफी कांटे को देखने को मिल सकता है।कांग्रेस जो पहले ही ग्वालियर-चंबल में आने वाली विजयपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में तत्कालीन मंत्री रामनिवास रावत को हरा कर अंचल में अपनी तगड़ी मौजदूगी दर्ज करा चुकी है। ऐसे में राजनीतिक पुनर्वास की आस लगाए भाजपा के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा के लिए चुनौती कम नहीं है।  

राजेंद्र भारती की विधायकी क्यों हुई खत्म?- कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को जिस मामले में सजा मिली है वह पूरा मामला 27 साल पुराना  साल 1998 का है, जब राजेंद्र भारती जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पिता के नाम पर संचालित एक संस्थान की 10 लाख रुपये की एफडी कराई थी, जिस पर तत्कालीन ब्याज दर 13.5 प्रतिशत थी। बाद में जब बैंक ने ब्याज दरें कम कर दीं, तब राजेंद्र भारती ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक के तत्कालीन लिपिक रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर दस्तावेजों में काट-छाँट की और एफडी की समय सीमा को बढ़ाकर 15 साल कर दिया, जिससे पुरानी ब्याज दर का लाभ मिलता रहे। इस मामले का खुलासा साल 2011 में हुआ जब बैंक के तत्कालीन प्रशासक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की मांग की। हालांकि पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने पर मामला जिला न्यायालय और फिर उच्च न्यायालय तक पहुँचा। बाद में राजेंद्र भारती की मांग को पूरे मामले को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर किए है। गुरुवार को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने बैंक एफडी हेराफेरी और जालसाजी के  मामले में 3 साल की सजा सुनाई है।  कोर्ट ने कांग्रेस विधायक को दो धराओं में 3--3 साल और एक धारा में 2 साल की सजा सुनाई है। हलांकि कोर्ट ने कांग्रेस विधायक को जमानत भी दे दी थी। कोर्ट के फैसले के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय ने राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता खत्म कर दी है।

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