एमए की किताब में आपत्तिजनक टिप्पणी, बवाल

गुरुवार, 23 मार्च 2017 (15:07 IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भूगोल के लिए एक निजी प्रकाशक द्वारा प्रकाशित किताब में गोंड जनजाति पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में कांग्रेस के हंगामे के बाद गुरुवार को उच्च शिक्षामंत्री जयभान सिंह पवैया ने बताया कि शासन ने भोपाल संभाग के आला अधिकारियों को प्रकाशक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा है।
 
एमए छात्रों के लिए प्रकाशित किताब 'भारत का भूगोल' में 'गोंड' शब्द का अर्थ गाय को मारने वाला एवं उसका मांस खाने वाला बताए जाने पर बुधवार को कांग्रेस के हंगामे के बाद पवैया ने गुरुवार को इस संबंध में अपना वक्तव्य दिया। कांग्रेस सदस्य बुधवार को इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के वक्तव्य की मांग कर रहे थे जिसके चलते विधानसभा की कार्यवाही 2 बार 10-10 मिनट के लिए स्थगित होने के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित हो गई थी।
 
पवैया ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह किताब सरकार की पाठ्यक्रम समिति की ओर से अनुमोदित नहीं थी, ये एक निजी प्रकाशक की किताब है जिसके बारे में 20 फरवरी को विभाग को शिकायत मिली थी जिसके बाद विभाग ने जांच शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि किताब महाकोशल में एक कॉलेज के प्राचार्य द्वारा खरीदे जाने के बारे में जानकारी मिलने के बाद प्राचार्य को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही लेखक और पुस्तक को ब्लैक लिस्टेड भी कर दिया गया है।
 
इसे सामाजिक समरसता के लिए बेहद गंभीर मुद्दा बताते हुए पवैया ने कहा कि जांच समिति ने इसे तथ्यों के विपरीत माना है। किताब से सौहार्द बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रकाशक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए भोपाल संभाग के पुलिस महानिरीक्षक और भोपाल कलेक्टर को पत्र लिखा गया है।
 
मंत्री पवैया ने इस दौरान कुलसचिव समिति द्वारा की गई जांच के दौरान पाए गए कुछ बिंदुओं को भी पढ़ा, जो अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान आदिवासियों के धर्मांतरण को आसान बनाने के लिए इससे संदर्भित जानकारियों से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि शासन ने एक परिपत्र जारी किया है कि पुस्तकालय प्रकाशकों की किताबें बिना पढ़े नहीं लें, साथ ही एक समिति बनाएं, जो किताबों की खरीदी करे।
 
इसके पहले शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने गुरुवार को फिर इस मुद्दे को उठाते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान या उच्च शिक्षामंत्री पवैया के वक्तव्य की मांग की। पवैया ने अपने वक्तव्य के दौरान केंद्र में कांग्रेस शासनकाल के दौरान राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एनसीईआरटी) द्वारा प्रकाशित कई पुस्तकों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से इतिहास को पलटकर देखने का आग्रह कर डाला जिसके बाद कांग्रेस सदस्यों ने एक बार फिर हंगामा करना शुरू कर दिया। 
 
पवैया ने एनसीईआरटी की एक किताब का जिक्र किया जिसमें आर्यों को गोमांस का भक्षक बताया गया था जिस पर कांग्रेस विधायक डॉ. गोविंद सिंह ने आपत्ति उठाते हुए कहा कि मंत्री से वक्तव्य की मांग की गई थी, भाषण देने की नहीं। आरोप-प्रत्यारोप के बीच नेता प्रतिपक्ष सिंह ने प्रदेश के एक विश्वविद्यालय की एक किताब का संदर्भ देते हुए दावा किया कि इसमें नाथूराम गोड़से और रावण को महापुरुषों की सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने किताबों के लेखकों का भी नाम बताया। 
 
सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष के हंगामे के दौरान ही अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा ने इस पूरे मामले को सामने लाने वाले कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम को अपना पक्ष रखने की अनुमति दी। मरकाम ने आरोप लगाया कि किताब के बारे में पता चलने पर उन्होंने 25 जनवरी को राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन दिया था लेकिन शासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई जिसके बाद उन्होंने विधानसभा में इस मामले को उठाया। 
 
उन्होंने कहा कि इस लेख के कारण आदिवासी समाज की प्रतिष्ठा को क्षति पहुंची है और सरकार इस मामले में समाज से माफी मांगे। (वार्ता)

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