जंगल में मंगल करते पकड़े गए : क्या है इस मुहावरे का राज

इस मुहावरे का प्रयोग सोशल मीडिया पर “जंगल में मंगल करते हुए पकड़े गए- डिलीट होने के पहले वीडियो देख लें...” खूब उकसाता है. ‘विशेष आमंत्रण’ देता हुआ ये शीर्षक इंसानियत को लज्जित करता और घटिया किस्म का प्रस्तुतीकरण होता है। जिसमें तथाकथित धर्म, इज्जत, चरित्र के ठेकेदार अपनी धूर्त जिम्मेदारियों का निर्वहन करते नजर आते हैं। 
 
जंगल में मंगल होना एक प्रचलित लोकोक्ति अथवा हिन्दी मुहावरा है। जिसका अर्थ होता है किसी ऐसे स्थान पर मेले का-सा दृश्य होना जिसके चारों ओर दूर दूर उजाड़ हो। वीरान स्थान को भी आनन्दमय कर देना। निर्जन स्थान में भी आनन्द का मिलना होता है। वीरान में रौनक होना। वीराने में ऐश-ओ-इशरत का सामान ... शून्य स्थान को भी आनन्दमय कर देना वगैरह...वगैरह शब्द का इस्तेमाल इसलिए कर रही हूं क्योंकि विशेष अर्थ को प्रकट करने वाले वाक्यांश को मुहावरा कहते हैं। मुहावरा पूर्ण वाक्य नहीं होता इसलिए इसका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं किया जा सकता। ऐसे वाक्यांश जो सामान्य अर्थ का बोध न कराकर किसी विलक्षण अर्थ की प्रतीति कराए उसे मुहावरा कहते हैं। 

पर यहां किस्सा जरा अनोखा है। खेतों में या निर्जन, सुनसान जगह पर भीड़ से घिरा हुआ जोड़ा अपराधबोध के साथ शर्मिंदा हुआ खड़ा होता है जिसे ये अहसास करवाया जाता है कि उसने घोर जघन्य, अक्षम्य, निंदनीय, पापकर्म किया है। जिसे उन्होंने रंगेहाथों पकड़ लिया जिससे देश का बहुत बड़ा नुकसान होने से बच गया, धर्म बच गया, धरती फटने से बच गई, आसमान टूटने से रह गया। सभी उन्हें धिक्कारे जा रहे, घर का पता, माता-पिता का नाम, उनका नाम लगातार पूछे जा रहे। सभी के हाथों में मोबाईल हैं सभी उनकी वीडियो बना रहे। कुछ उन्हें जलील कर रहे, गन्दी भाषा में जुमले उछल रहे, गन्दी गलियों के साथ अपने पुरुषार्थ को सिद्ध कर रहे। 

कहीं कहीं हद तो ये है कि उनका जुलूस भी निकाला जा रहा, जबरिया दोनों का ब्याह भी कर दिया जा रहा। कुछ मानसिक विक्षिप्त मुख्य भूमिका निभाते जो रोबीले अंदाज में जोड़े को लतियाते जाते और सिन्दूर, मंगलसूत्र कन्या/लड़की/औरत के गले व मांग में बंधवाते भरवाते। लड़की को बालक/लड़के/पुरुष के पैर छूने के लिए मजबूर करते। जोड़ा निरीह, बेबस, लाचार उस उन्मादी कुंठित भीड़ के आगे मुंह छुपाये खड़ा रहता और जान/इज्जत बचने की खातिर उनके उस क्रूर मनमाने आदेशों को मानने के लिए बाध्य होता। ये होता उनका जंगल में मंगल करने का दंड... इस घटना/दुर्घटना के बीच बीच में देवी-देवताओं के जयकारे भी गूंजते।  
 
मुहावरा अपना असली रूप कभी नहीं बदलता है। मुहावरे का शब्दार्थ ग्रहण नहीं किया जाता है उसका केवल विशेष अर्थ ही ग्रहण किया जाता है। मुहावरे का अर्थ प्रसंग के अनुसार ही निश्चित होता है। हिंदी भाषा में मुहावरों का प्रयोग भाषा को सुंदर, प्रभावशाली ,संक्षिप्त तथा सरल बनाने के लिए किया जाता है। ये लिंग, वचन, क्रिया के अनुसार वाक्यों में प्रयुक्त किये जाते हैं। अतः कोई भी धर्म, जाति के उम्र, सामाजिक बंधनों के परे सभी पर लागू होते हैं। 

इस लिखने को समर्थन या विरोध के रूप में देखने बजाय समझने की ज्यादा जरूरत है। समलैंगिकता, लिव इन रिलेशनशिप जैसी अन्य कई मुद्दों पर बनने वाले कानूनों की ओर बढ़ते क़दमों पर इस तरह की हरकतें जिसमें अमानवीय कृत्य को बढ़ावा मिलता है कहां तक उचित है? वीडियो वायरल करना कहां का न्याय है? आपसी सहमति से हुए कर्म को चाहे वो जायज हों या नाजायज इस जलील रूप से वीडियो बना कर उन्हें अपराधी ठहराने वाले आप कौन?
 
मुहावरे हिंदी भाषा की समृद्धि और सभ्यता के विकास के मापक है। इसकी अधिकता या न्यूनता से भाषा को बोलनेवालों के श्रम,भाषा निर्माण की शक्ति, अध्ययन ,मनन, सबका एक साथ पता चलता है। जो समाज जितना अधिक व्यवहारिक और कर्मठ होगा उसकी भाषा में इनका प्रयोग उतना ही अधिक होगा। देश और समाज की तरह मुहावरे भी बनते बिगड़ते रहते हैं। नए समाज के साथ नए मुहावरे आते हैं। इंसानों के साथ साथ भाषा के बलात्कार से भी ये लोग बाज नहीं आते।  ऐसे लोग समाज में रहने लायक नहीं होते इनका बहिष्कार करना चाहिए। 
 
 

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