Guru Nanak : गुरु नानकदेव ने दिखाया था मोक्ष तक पहुँचने का सहज और सरल मार्ग

nanak dev 
 

सिख होना बड़ा कठिन है क्योंकि सिख का अर्थ है- संन्यासी और गृहस्थ एक साथ। रहना घर में और ऐसे रहना जैसे नहीं हो। रहना घर में और ऐसे रहना जैसे हिमालय में हो। करना दुकान, लेकिन याद परमात्मा की रखना। गिनना रुपए, नाम उसका लेना। इस तरह का संदेश दुनिया भर में पहुंचाने वाले गुरु नानक देव (Guru Nanak) सिख धर्म के दस गुरुओं की कड़ी में प्रथम हैं। 
 
नानक जी ने एक अनूठे धर्म को जन्म दिया है, जिसमें गृहस्थ और संन्यासी एक हैं। वे कहते हैं वही आदमी अपने को सिख कहने का हकदार है, जो गृहस्थ होते हुए संन्यासी हो, संन्यासी होते हुए गृहस्थ हो। गुरु नानक देव से मोक्ष तक पहुंचने के एक नए मार्ग का अवतरण होता है। इतना प्यारा और सरल मार्ग कि सहज ही मोक्ष तक या ईश्वर तक पहुंचा जा सकता है। नानक संसार के विरोध में नहीं हैं। नानक संसार के प्रेम में हैं, वे कहते हैं कि संसार और उसका बनाने वाला दो नहीं। तुम इसे भी प्रेम करो, तुम इसी में उसको प्रेम करो। तुम इसी में उसको खोजो। 
 
आदिकाल से ही भारतीय संस्कृति में गुरु का महत्व रहा है। कबीर ने कहा था कि गुरु बिन ज्ञान न होए साधु बाबा। तब फिर ज्यादा सोचने-विचारने की आवश्यकता नहीं है बस गुरु के प्रति समर्पण कर दो। हमारे सुख-दु:ख और हमारे आध्यात्मिक लक्ष्य गुरु को ही साधने दो। ज्यादा सोचोगे तो भटक जाओगे। अहंकार से किसी ने कुछ नहीं पाया। सिर और चप्पलों को बाहर ही छोड़कर जरा अदब से गुरु के द्वार खड़े हो जाओ बस। गुरु को ही करने दो हमारी चिंता। हम क्यों करें।
 
मोक्ष तक जाने का सरल मार्ग दिखलाने वाले सिख धर्मगुरु गुरु नानक देव का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन 1469 को राएभोए के तलवंडी नामक स्थान में, कल्याणचंद (मेहता कालू) नाम के एक किसान के घर हुआ था। उनकी माता का नाम तृप्ता था। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि सोलह वर्ष की आयु में नानक देव का विवाह हुआ था। उन्हें 2 पुत्र भी हुए, जिनका नाम श्रीचंद और लक्ष्मीचंद था। 
 
सन् 1507 में वे अपने परिवार का भार अपने ससुर पर छोड़कर यात्रा पर निकल पड़े तथा 1521 तक उन्होंने भारत, अफगानिस्तान, फारस और अरब के प्रमुख स्थानों का भ्रमण किया। इतना ही नहीं कहा जाता हैं कि उन्होंने चारों दिशाओं में भ्रमण किया था। कहते हैं कि नानक देव जी से ही हिंदुस्तान को पहली बार हिंदुस्तान नाम मिला। लगभग सन् 1526 में जब बाबर द्वारा देश पर हमला करने के बाद गुरु नानक देव जी ने कुछ शब्द कहे थे तो उन शब्दों में पहली बार हिंदुस्तान शब्द का उच्चारण हुआ था- 'खुरासान खसमाना कीआ, हिंदुस्तान डराईआ।' 
 
विश्व में भ्रमण के दौरान गुरु नानक देव के साथ अनेक रोचक घटनाएं घटित हुईं। तलवंडी को अब नानक के नाम पर ननकाना साहब कहा जाता है, जो पाकिस्तान में है। सन् 1539 में उन्होंने देह त्याग दी।
 
दुनिया को मोक्ष तक पहुंचने का जो सहज और सरल मार्ग गुरु नानक देव ने दिखाया हैं, वह उनके सिद्धांतों से स्पष्ट झलकता है। जैसे- * ईश्वर एक है। * सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो। *सभी स्त्री और पुरुष बराबर हैं। * सदा प्रसन्न रहना चाहिए। * शरीर को जिंदा रखने के लिए भोजन जरूरी है, लेकिन लोभ/लालच एवं संग्रहवृत्ति बुरी है। * ईश्वर से सदा अपने को क्षमाशीलता मांगना चाहिए। * जगत का कर्ता सब जगह और सब प्राणी मात्र में मौजूद है। * सर्वशक्तिमान ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी का भय नहीं रहता।* मेहनत और ईमानदारी से कमाई करके उसमें से जरूरतमंद को भी कुछ देना चाहिए। * ईमानदारी से मेहनत करके जीवनयापन करना चाहिए। * बुरा कार्य करने के बारे में न सोचें और न किसी को सताएं।
 
इस तरह हम इस सरल तथा सहज मार्ग को अपने आचरण में उतार कर मोक्ष तक पहुंचने का रास्ता आसानी बना सकते हैं। 

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