हिन्दी का उपयोग बढ़ेगा तो देश भी आगे बढ़ेगा-प्रणब मुखर्जी

बुधवार, 14 सितम्बर 2016 (18:31 IST)
नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हिन्दी दिवस पर देशवासियों तथा हिन्दी प्रेमियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिन्दी विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है और जितना अधिक हम हिन्दी और प्रांतीय भाषाओं का प्रयोग शिक्षा, ज्ञान विज्ञान, प्रौद्योगिकी आदि में करेंगे, उतनी ही तेज गति से भारत का विकास होगा।
हिन्दी दिवस पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत की संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को भारत की राजभाषा के रूप में हिन्दी को स्वीकार किया था। 
 
हिन्दी जनसाधारण द्वारा बोली जाने वाली एक सरल भाषा है। हिन्दी पुरातन भी है और आधुनिक भी। इसी विशेषता के कारण हिन्दी को भारत की राजभाषा का सम्मान प्राप्त है।
 
उन्होंने कहा कि आज वैश्वीकरण के दौर में, हिन्दी का महत्व और भी बढ़ गया है। हिन्दी विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है। आज विदेशों में अनेक विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है। ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकें बड़े पैमाने पर हिन्दी में लिखी जा रही है।
 
सोशल मीडिया और संचार माध्यमों में हिन्दी का प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि मेरा मानना है कि जितना अधिक हम हिन्दी और प्रांतीय भाषाओं का प्रयोग शिक्षा, ज्ञान विज्ञान, प्रौद्योगिकी आदि में करेंगे, उतनी तेज गति से भारत का विकास होगा। 
 
उन्होंने कहा कि हिन्दी भारतवर्ष की विविधता में एकता का भी प्रतीक है। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर, महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, सरदार पटेल, डॉ. अम्बेडकर, सी. राजगोपालाचारी जैसे महापुरुषों ने हिन्दी को भारत की संपर्क भाषा के रूप में अपनाकर आजादी की लड़ाई लड़ी थी।
 
उन्होंने कहा कि हिन्दी भारतीयता की चेतना है तथा सभी प्रांतीय भाषाओं की संपर्क भाषा की भूमिका निभाती है। हिन्दी और भारतीय प्रांतीय भाषाओं के साहित्य के परस्पर अनुवाद को हमें बढ़ावा देना होगा।
 
प्रणब ने कहा कि हिन्दी और भारतीय प्रांतीय भाषाओं के साहित्य के परस्पर अनुवाद को बढावा देने से हिन्दी तथा प्रांतीय भाषाओं में संबंध और गहरा होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि लोगों को एक दूसरे के ऐतिहासिक, साहित्यिक तथा सांस्कृतिक पहलुओं का ज्ञान प्राप्त होगा। 
 
भारत में लोग जब यह समझेंगे कि हमारा अतीत और वर्तमान और हमारा साहित्य और संस्कृति एक है, तब राष्ट्रीय एकता की भावना और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा विकास योजनाएं तथा नागरिक सेवाएं प्रदान करने में हिन्दी  के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। 
 
हिन्दी तथा प्रांतीय भाषाओं के माध्यम से हम बेहतर जन सुविधाएं लोगों तक पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय द्वारा विश्व हिन्दी सम्मेलन और अन्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के माध्यम से हिन्दी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने का कार्य किया जा रहा है। 
 
इसके अलावा प्रत्येक वर्ष सरकार द्वारा प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है जिसमें विश्व भर में रहने वाले प्रवासी भारतीय भाग लेते हैं। प्रणब ने कहा कि विश्व हिन्दी  सचिवालय विदेशों में हिन्दी का प्रचार-प्रसार करने और संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी  को आधिकारिक भाषा बनाने के लिए कार्यरत है। 
 
संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व योग दिवस को अधिसूचित करना भी हमारे लिए एक गौरव की बात है। इसके लिए प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी बधाई के पात्र हैं। सरकारी कार्यक्रमों में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने अनेक पुरस्कार योजनाएं शुरू की हैं। 
 
सरकार द्वारा हिन्दी में अच्छे कार्य के लिए राजभाषा कीर्ति पुरस्कार योजना के अंतर्गत शील्ड प्रदान की जाती है। हिन्दी  में लेखन के लिए राजभाषा गौरव पुरस्कार का प्रावधान है। आधुनिक ज्ञान विज्ञान में हिन्दी में पुस्तक लेखन को प्रोत्साहन देने के लिए भी सरकार पुरस्कार प्रदान करती है। इन प्रोत्साहन योजनाओं से हिन्दी  के विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।
 
उन्होंने कहा कि हिन्दी की शक्ति और क्षमता से हम भली-भांति परिचित हैं। महात्मा गांधी ने कहा था, कि राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी  को काम में लाना देश की उन्नति के लिए आवश्यक है।
 
राष्ट्रपति ने कहा कि मैं हिन्दी के प्रचार-प्रसार में सराहनीय योगदान देने वाले सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देता हूं। मैं सभी देशवासियों से आह्वान करता हूं कि वे हिन्दी की प्रगति के लिए अपना पूर्ण योगदान दें। (भाषा) 

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