Israel Iran War 2026: पश्चिम एशिया (West Asia) के समीकरण रातों-रात बदल गए हैं। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य ऑपरेशन इजराइल और अमेरिका का एक 'संयुक्त हमला' है। इस हमले ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा इस ऑपरेशन की 'टाइमिंग' को लेकर हो रही है।
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कूटनीतिक जाल : क्या अमेरिका और इजरायल ने जानबूझकर इस समय को चुना ताकि दुनिया को यह संदेश जाए कि भारत इस हमले में उनके साथ खड़ा है?
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भारत की विदेश नीति का इस्तेमाल : विशेषज्ञों का एक वर्ग इसे भारत की 'स्वतंत्र विदेश नीति' (Strategic Autonomy) को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देख रहा है।
ईरान के साथ संबंध
भारत के ईरान के साथ पुराने और मजबूत संबंध हैं (जैसे चाबहार पोर्ट)। इस हमले की टाइमिंग से ऐसा लग सकता है कि भारत अब पूरी तरह से इजराइल-अमेरिका खेमे में जा चुका है, जो भारत की संतुलित विदेश नीति के लिए एक चुनौती बन सकता है।
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है और इजराइल पर मिसाइलें दागने की खबरें आ रही हैं। हिज्बुल्ला और हूती भी ईरान के समर्थन में इस जंग में उतर गए हैं। इस बीच, रूस ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा है कि शांति दूत ट्रंप ने अपना असली रंग दिखा दिया है। पूरी दुनिया की नजर अब भारत के रुख पर है। क्या भारत इस तनाव के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा या अपनी 'मौन' कूटनीति पर कायम रहेगा?