वो टीआरपी के लिए कपड़े उतारते हैं, मैं पहनाता हूं-सुरेंद्र शर्मा

हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा अपनी सादगी और भदेस व्यंग्य के लिए जाने जाते हैं। पत्नी से डरने वाले एक देहाती पति के रूप में शर्मा जी ने दशकों तक लोगों को हंसाया है, लेकिन स्टैंडअप कॉमेडी के इस दौर में उन्होंने खुद को प्रासंगिक बनाए रखा है।
 
एकाएक इंदौर एयरपोर्ट पर उनसे मुलाकात हुई तो मैंने उनसे यह पूछने की हिम्मत कर ही ली कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस युग मे आखिर वे खुद को कैसे बनाए हुए हैं? उनका जवाब उन्हीं की तरह सादगी भरा था, बोले भाया, ये इंटरनेट विंटरनेट तो हाल के चोचले हैं। मैं तो आज भी लोगों के सामने ही अपने व्यंग्य कहने वाला सीधा-साधा इंसान हूं, जब तक लोगों की ताली न बजे मुझे मजा ही नहीं आता।
 
यूट्यूब और सोशल मीडिया पर छाए स्टैंडअप कॉमेडियन से तुलना करने पर वे बोले कि भाया वो बेचारे टीआरपी के चक्कर में लोगों के कपड़े उतारते हैं और मैं कपड़े पहनाने का काम करता हूं। उन्हें सीधे लोगों से संवाद करना ही अच्छा लगता है। वैसे भी एयरपोर्ट पर उनके साथ सेल्फी लेने को उमड़ी भीड़ देखकर तो यही लगता है कि उन्हें फिलहाल तो प्रसिद्धि के लिए सोशल मीडिया या फूहड़ता से भरी स्टैंडअप कॉमेडी की जरूरत नहीं। वैसे देखें तो यही तो हैं असली स्टैंडअप कॉमेडियन, वो भी बिना किसी सोशल मीडिया प्रमोशन के।

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