उमा भारती के 'निशाने' पर शिवराजसिंह चौहान

बुधवार, 18 अप्रैल 2018 (12:17 IST)
झांसी। केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने अगले वर्ष होने जा रहे लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर बुंदेलखंड कार्ड खेला है, उन्होंने भाजपा सरकार के होते हुए बुंदेलखंड अलग राज्य नहीं बन पाने के लिए मध्यप्रदेश के लोगों को जिम्मेदार ठहराया है, इस तरह उन्होंने इस मामले में गेंद शिवराजसिंह चौहान के पाले में फेंक दी है।
 
अब एक बार फिर 2019 के चुनाव से ठीक कुछ समय पहले स्थानीय लोगों में 'दीदी' के नाम से मशहूर सुश्री उमा भारतीय का बुंदेलखंड प्यार अचानक फिर जगता नजर आने लगा है और इसी की एक बानगी बुंदेलखंड के लोगों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा में देखने को मिली, मौका था बुंदेलखंड क्षेत्र मे बनने जा रहे डिफेंस कॉरिडोर और फूड पार्क के बारे में लोगों को जानकारी देना। इस दौरान जनसभा में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण की भी मौजूदगी रही। 
      
इस जनसभा में मंच पर आते ही लोगों की नाराजगी से अच्छी तरह वाकिफ सुश्री उमा भारती ने कहा कि राज्य तो बहुत पहले बन जाता, लेकिन मध्यप्रदेश के इलाके बुंदेलखंड राज्य का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं और ऐसे में जो इलाका केवल उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में आता है वह पृथक बुंदलेखंड राज्य के लिए पर्याप्त नहीं है।
 
पृथक बुंदेलखंड के लिए संघर्ष करने वाले संगठनों से सुश्री भारती ने कहा कि अगर आप लोग बुंदेलखंड की सीमा रेखा पहचान कर बता दें तो जब भी राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन होगा तो उनकी पार्टी बुंदेलखंड राज्य का पूरा-पूरा समर्थन करेगी। इस तरह 2014 की जीत के बाद अभी तक पृथक राज्य नहीं बन पाने की जिम्मेदारी वह मध्यप्रदेश पर डालकर अगले चुनाव में फिर जीत दिलाने का आग्रह करती नजर आईं। 
 
वह पिछले चुनाव में भी लोगों को पृथक बुंदेलखंड के नाम पर प्रभावित करने में सफल रहीं थीं और इस क्षेत्र से जीत हासिल कर उन्होंने संसद का रास्ता तय किया था। सुश्री उमा भारती ने 2014 के चुनाव मे जीत के बाद भी तीन साल के अंदर बुंदेलखंड राज्य के निर्माण के वादे इरादे लोगों से किए और खूब राजनीति की। बुंदेलखंड की इस बेटी पर भी लोगों ने पूरा भरोसा जताया लेकिन जीत के बाद के वर्षों में दीदी ने जो किया वह किसी से छिपा नहीं है।
              
तीन साल में अलग राज्य बनना तो दूर जीत के बाद तीन साल तक क्षेत्रीय सांसद इस क्षेत्र में यदा कदा ही नजर आईं। लोगों के बीच इस दौरान यह जुमला हास परिहास का केंद्र बन गया कि 'दीदी को किसी ने देखा है क्या'।
 
अब चुनाव से पहले एक बार फिर लोगों को बुंदेलखंड के विकास लिए उनके द्वारा किए गए प्रयासों को सामने रखने का वह कोई मौका नहीं गंवा रही हैं। गत सोमवार को मुख्यमंत्री की जनसभा में उन्होंने लोगों को इस डिफेंस कॉरिडोर के लिए अपने प्रयासों का बखान किया। लोगों को बताया कि कैसे डिफेंस कॉरिडोर बनाने की बात शुरू होते ही उन्होंने बुंदेलखंड में इसके बनाने के लिए कितने प्रयास किए और रक्षामंत्री के भी पीछे पड़ी रहीं कि वह जल्द से जल्द बुंदेलखंड आएं ताकि यहां के लोग इन दो नई सौगातों के लिए उनका धन्यवाद कर सकें।
               
बुंदेलखंड राज्य के मुद्दे पर लोगों की नाराजगी भी केंद्रीय मंत्री से छुपी नहीं है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने वादों से मुकरते हुए पृथक राज्य न बन पाने का ठीकरा मध्यप्रदेश के सिर फोड़ दिया है। 
 
मध्यप्रदेश में इस वर्ष चुनाव हैं, बुंदेलखंड राज्य निर्माण में मध्यप्रदेश को रोड़ा बताकर वह संभवत: मध्यप्रदेश चुनाव में कुछ हंगामा करने की तैयारी में हैं। हालांकि वह मीडिया के सामने अब चुनाव नहीं लड़ने की बात कह चुकी हैं। उनकी मंशा चाहे जो हो लेकिन पृथक बुंदेलखंड के लिए दीदी पर भरोसा कर स्थानीय लोग खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
 
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सुश्री भारती के इस तरह शिवराजसिंह चौहान पर निशाना साधने की कवायद को देखते हुए राजनीति के जानकारों में यह सुगबुगाहट होने लगी है कि कहीं सुश्री भारती को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी तो नहीं नजर आने लगी है। इस सब के बीच बुंदेलखंड की लड़ाई से तो उमा दूर ही नजर आ रही हैं। हां, यह बात दीगर है कि इस मुद्दे पर राजनीति करना वह कहीं नहीं भूलतीं। (वार्ता)

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