चला गया ज्ञान बांटने वाला महामानव

-रोहित कुमार, न्यूज़ीलैंड
 
अपनी सादगी व युवाओं के प्रेरणास्रोत पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम (डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम) अब हमारे बीच नहीं हैं। छात्रों और युवाओं में डॉ. कलाम बहुत प्रसिद्ध थे। ज्ञान बांटने वाले इस महामानव का निधन भी छात्रों के (शिलांग) बीच ही हुआ। डॉ. कलाम अपनी अंतिम सांस तक सक्रिय रहे।
 
डॉ. कलाम को उनके श्रेष्ठ कार्यों के कारण ही 'जनसाधारण का राष्ट्रपति' कहा जाता है। कलाम का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को एक मध्यमवर्गीय तमिल परिवार में रामेश्वरम (तमिलनाडु) में हुआ था। उनके पिता जैनुलाबदीन की कोई बहुत अच्छी औपचारिक शिक्षा नहीं हुई थी। वे आर्थिक रूप से सामान्य परंतु बुद्धिमान व उदार थे। इनके पिताजी एक स्थानीय ठेकेदार के साथ मिलकर लकड़ी की नौकाएँ बनाने का काम करते थे, जो हिन्दू तीर्थयात्रियों को रामेश्वरम से धनुषकोटि ले जाती थीं। इनकी माँ, आशियम्मा उनके जीवन का आदर्श थीं। कलाम ने भौतिकी और अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई की।
 
'हमारे पथ प्रदर्शक' भारत के ग्याहरवें राष्ट्रपति और 'मिसाइलमैन' के नाम से प्रसिद्ध 'एपीजे अब्दुल कलाम' की चर्चित पुस्तक है और इसके अतिरिक्त 'विंग्स ऑफ़ फायर', 'इंडिया 2020- ए विज़न फ़ॉर द न्यूमिलेनियम', 'माईजर्नी' तथा 'इग्नाटिड माइंड्स- अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया' उनके द्वारा लिखी गई अन्य प्रसिद्ध पुस्तकें हैं।
 
बहुत कम लोग यह जानते हैं कि वे अपनी पुस्तकों से हुई आमदनी (रॉयल्टी) का अधिकांश हिस्सा स्वयंसेवी संस्थाओं को सहायतार्थ दे देते थे। मदर टेरेसा द्वारा स्थापित 'सिस्टर्स ऑफ चैरिटी' उनमें से एक है। पुरस्कारों के साथ मिली नकद राशि भी वे परोपकार के कार्यों के लिए अलग रखते थे।
 
डॉ. कलाम का शायराना केश-विन्यास : डॉ. कलाम के राष्ट्रपति बनने पर इनके केशों की भी काफी चर्चा रही। आपका शायराना केश-विन्यास (हेयर स्टाइल) चर्चा में रहा। कई लोगों ने पत्र लिखकर इन्हें अपने बालों को अलग ढंग से कटवाने की राय व सुझाव दे डाले। कलाम का उत्तर था, उनके बाल जैसे पहले थे राष्ट्रपति होने पर भी वैसे ही रहेंगे। और उनका केश-विन्यास वही रहा।  
 
'हम होंगे कामयाब' : 'हम होंगे कामयाब' डॉ. कलाम का पसंदीदा गीत था। वे अकसर संकट की घड़ी में इस गीत को गुनगुनाया करते थे। 
"होंगे कामयाब'
हम होंगे कामयाब,
हम होंगे कामयाब एक दिन।
हो-हो-हो पूरा है विश्वास, मन में है विश्वास,
हम होंगे कामयाब एक दिन....."
 
यह गीत गिरिजाकुमार माथुर का अनुदित 'अभियान गीत' है जो मूल रूप से एक अंग्रेजी गीत 'We Shall Overcome' का रूपांतर है।
 
'मैं ज्ञान का दीपक जलाए रखूंगा : डॉ. कलाम बहुमुखी प्रतिभा के स्वामी थे।  उन्होंने कविता भी लिखी है:
 
“अचानक एक फूल मेरे सिर पर गिरा
और बोला -
ओ सपने बुनने वाले
ईश्वर की तलाश क्यों?
वह हर कहीं है
जीवन उसका आशीर्वाद है
प्रकृति से प्रेम करो और उसके सभी जीवों का
ध्यान रखो
तुम हर जगह ईश्वर को पाओगे।“
 
डॉ. कलाम का लिखा हुआ गीत भी बहुत चर्चा में रहा है:
“भारत के युवा नागरिक होने के नाते
प्रौद्योगिकी, ज्ञान और देश-प्रेम से युक्त
मैं महसूस करता हूं कि छोटा लक्ष्य अपराध है।
मैं एक महान अंतर्दृष्टि के लिए कार्य करूंगा और पसीना बहाऊंगा
देश को एक विकसित राष्ट्र में रूपांतरित करने की अंतर्दृष्टि के लिए
जो मूल्य-प्रणाली के साथ आर्थिक शक्ति से युक्त हो।
मैं भारत के एक अरब नागरिकों में से हूं
केवल अंतर्दृष्टि ही अरबों आत्माओं को प्रज्ज्वलित करेगी।
वह मेरे अंदर प्रवेश कर चुकी है
किसी भी संसाधन की अपेक्षा तेजस्वी आत्मा
सबसे सशक्त संसाधन है धरती पर,
धरती के ऊपर तथा धरती के नीचे
मैं ज्ञान का दीपक जलाए रखूंगा
ताकि विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त हो सके।“
 
गीत की पंक्तियां कितनी सत्य हैं, 'मैं ज्ञान का दीपक जलाए रखूंगा...' डॉ. कलाम ने सचमुच अपनी अंतिम सांस तक ज्ञान का दीपक जलाए रखा। अब यह हमारा कर्तव्य है कि हम डॉ. कलाम के द्वारा प्रज्ज्वलित किए गए इस 'ज्ञान के दीपक' को सदैव प्रज्ज्वलित किए रखें। 

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