इतिहास में दफन ना हो जाए बाबा सोमनाथ प्राचीन मंदिर (वीडियो)

अवनीश कुमार

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2017 (19:32 IST)
उत्तर प्रदेश के कानपुर में 2000 वर्ष पुराना बाबा सोमनाथ का मंदिर कल्याणपुर में स्थित है। यहां पर सावन में और शिवरात्रि पर बाबा सोमनाथ के दर्शन करने के लिए हजारों की तादाद में श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं और अपने कष्टों का निवारण भी पाते हैं।
इस मंदिर की मान्यता यह है कि अगर बाबा के पास बैठकर सच्चे मन से कुछ मांगा जाए तो वह बाबा जरूर देते हैं, लेकिन इसे दुर्भाग्य कहें या फिर वक्त की मार जैसे-जैसे समय बढ़ता गया वैसे-वैसे इस प्राचीन मंदिर से लगी जमीन खतरे में पड़ती गई। 
 
 
कल्याणपुर के कुछ दबंगों ने तो भगवान के इस पावन स्थल को भी नहीं छोड़ा। वहीं जिला प्रशासन मूकदर्शक बना यह सब कुछ देख रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है इस प्राचीन मंदिर के पास मात्र 100 कदम की दूरी पर थाना कल्याणपुर स्थित है, लेकिन फिर भी थाना कल्याणपुर में बैठे अधिकारियों की इस मंदिर के साथ हो रहे अन्याय दिखता ही नहीं है। जहां एक तरफ बाबा भोलेनाथ अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करते हैं तो वहीं बाबा भोलेनाथ के इस मंदिर के कष्टों का निवारण कौन करेगा इसके बारे में आज भी इस मंदिर के पुजारी सोच रहे हैं।
सोमनाथ मंदिर के पुजारी अमरनाथ पुरी कहते हैं कि उनके पूर्वजों ने अपना पूरा जीवन इस प्राचीन मंदिर पर समर्पित कर दिया, लेकिन वह अब दिन प्रतिदिन इन दबंगों के सामने हारते हुए नजर आ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा मुख्य कारण जिला प्रशासन व पुलिस की इस मंदिर को लेकर उदासीनता है।  ना ही तो यहां के विधायक इस मंदिर की सुध लेते हैं और ना ही यहां का प्रशासन इस मंदिर की सुध लेता है। 
 
सबसे बड़ी बात तो यह है कि मंदिर के नाम पर पार्टियां अपनी राजनीतिक रोटियां सकती हैं तो क्या उन पार्टियों के नेताओं को इस मंदिर की समस्या सुनाई या दिखाई नहीं पड़ती? ऐसे बहुत से सवाल है जो इस मंदिर को लेकर जुड़े हुए हैं, जिसका जवाब जिला प्रशासन के पास होते हुए भी नहीं है। अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो आने वाले समय में बाबा भोलेनाथ के इस मंदिर की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी।
 
कहीं ऐसा ना हो खुद बाबा भोले को इस मंदिर को छोड़ना पड़े और कहीं इतिहास के पन्नों में सोमनाथ मंदिर दफन हो जाए। यहां के पुजारी अमरनाथ की मानें तो वह तो जिला प्रशासन पुलिस और स्थानीय विधायक तक से इस मंदिर से जुड़ी समस्या को लेकर एक नहीं हजारों बार कह चुके हैं, लेकिन फिर भी किसी के पास इतना समय नहीं है कि इस प्राचीन मंदिर की सुध ले सके।

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