शादी के बाद ऐसे संभालें नए रिश्तों को

शादी के पहले का उत्साह और धूमधाम के साथ विवाह संस्कार समाप्त होने तक, दूल्हा- दुल्हन दोनों का अनुभव बेहद खास होता है। लेकिन असल जिंदगी की शुरुआत तब होती है, जब शादी की सभी रस्मों के बाद आप एक दूसरे के साथ रहना प्रारंभ करते हैं। इस समय खास तौर से नवविवाहिता के लिए सब कुछ एकदम नया होता है, जिसके बीच उसे सामंजस्य बैठाना होता है। इन सभी के बीच सुखी जीवन के लिए आपको कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जानिए कौन सी हैं वे बातें -
 
1 सकारात्मक सोच - शादी के बाद नए घर में, न लोगों के बीच आपका नया जीवन शुरू होता है। इस शुरुआत को सकारात्मक बनाएं। सकारामक सोच के साथ इस नए जीवन में प्रवेश करें और हर किसी को दिल से अपना मानें।

2 पति के प्रति - बेशक पति से आपकी कई अपेक्षाएं होंगी जो समय के साथ-साथ एक दूसरे को समझते हुए पूरी भी होंगी। लेकिन किसी भी बात को मन में नकारात्मक न बनाएं। खास तौर से पति का मां के अनुसार चलना अगर आपको सही नहीं लगता तो अपना नजरिया बदलें और उन्हें अपनाने का प्रयास करें।  इसके बाद आपको कोई बात बुरी नहीं लगेगी। 
 
3 बंधन न बनाएं - पति या पत्नी के प्रति इतना खुलापन रखें कि वह अपने रिश्तेदारों या घरवालों के साथ सहज होकर रह सके।  आपने जिससे विवाह किया है उसके अपने कुछ रिश्ते हैं, जो उसके साथ बचपन से जुड़े हैं। सबसे किनारा करके वह केवल आपका ही होकर रहे, यह बात व्यावहारिक तौर पर गलत है, जिसे आपको स्वीकार करना होगा।

4 दोस्तों के बीच - पति के दोस्तों से चिढ़ने या नाराज होने के बजाए उनके साथ मुस्कुराते हुए पेश आएं और सहज होने की कोशि‍श करें। रिश्ते के अनुसार अपनी गरिमा बनाए रखें और पति के रिश्तों की कद्र करें। इससे उनके साथ आपका भी सम्मान बढ़ेगा। यही बात पति पर भी लागू होती है। 
 
5 ननद के साथ - घर में अगर अविवाहित ननद है, तो उनके साथ ननद के बजाए सहेली की तरह पेश आए, ताकि यह रिश्ता मधुर बना रहे। एकदूसरे के प्रति प्रतिस्पर्धा का भाव न रखें और न ही नीचा दिखाने का प्रयास करें।  अगर आपको कोई बात पसंद नहीं भी आती तो आप प्रेम के साथ अपनी बात रखकर रिश्ते को मजबूत बना सकती हैं।

6 सास-ससुर - पति और पत्नी दोनों को चाहिए कि एक-दूसरे के माता-पिता के सास-ससुर के बजाए मां और पिता मानकर चलें अौर उतना ही सम्मान दें। नवविवाहिता के लिए सास के साथ मधुर रिश्ता रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि वे आपके पति की मां हैं और उन्होंने उम्मीदों के साथ अपने बेटे के लिए आपको चुना है। अगर आप उन्हें सम्मान देंगी और उनका मार्गदर्शन लेंगी तो उनके दिल में अपके लिए अच्छी जगह बन जाएगी। यह बात आपके और पति के बीच भी मिठास पैदा करेगी। 
 
7 घर के हर सदस्य के प्रति अपना रवैया प्यार भरा रखें और सभी का ख्याल रखने का प्रयत्न करें।  इससे आप सभी के दिल में जगह बना पाएंगी और आपके रिश्ते भी सभी से मजबूत होंगे।

8 चूंकि अब आप एक ग्रहिणी के तौर पर भी नया जीवन शुरु करने जा रही हैं, इसलिए अपने अंदर परिपक्वता लाएं और समझदारी रखें। शादी के पहले आप जैसी भी रहीं हों, लेकिन ससुराल में आपसे समझदारी और प्रेम की अपेक्षा हर किसी को होती है। 
 

पति के प्रति एकाधि‍कार की भावना न रखें। अगर उनकी महिला मित्र या सहयोगी हैं तो इसके सामान्य तौर पर अपनाएं। बगैर किसी के बारे में जाने और सोचे पति से इस बारे में ऐतराज न जताएं। 

10 पति या पत्नी के आकर्षक होने पर एक दूसरे में एकाधि‍कार की भावना आती है।  लेकिन इसे इतना न बढ़ाएं कि सह शक या कलह में बदल जाए।  एक-दूसरे पर विश्वास करें और सहयोग के साथ अपने जीवन को आगे बढ़ाएं।
 

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