24 जून 2023 को महारानी दुर्गावती का बलिदान दिवस है। क्रूर तुर्क अकबर, रानी के साम्राज्य को अपने कब्जे में लेकर रानी को अपने हरम की दासी बनाकर रखना चाहता था, लेकिन रानी ने जिस बहादुरी के साथ लड़ाई की वह अदम्य साहस और बलिदान की एक अमीट कहानी लिख गई। महान वीरांगान और छत्राणी रानी दुर्गावती ने अकबर की सेना को कई बार धूल चटा दी थी।
रानी दुर्गावती का बलिदान:-
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आखिरी बार में अकबर ने फिर एक शक्तिशाली सेना भेजी और तब रानी ने लड़का एक भयंकर युद्ध।
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धन्य है रानी दुर्गावती का पराक्रम कि उसने अकबर के जुल्म के आगे झुकने से इनकार कर स्वतंत्रता और अस्मिता के लिए युद्ध भूमि को चुना।
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दुर्गावती बड़ी वीर थी। वीरांगना महारानी दुर्गावती साक्षात दुर्गा थी।
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इस वीरतापूर्ण चरित्र वाली रानी ने अंत समय निकट जानकर अपनी कटार स्वयं ही अपने सीने में मारकर आत्म बलिदान के पथ पर बढ़ गईं।
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अनेक बार शत्रुओं को पराजित करते हुए 24 जून 1564 में बलिदान दे दिया।
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महारानी ने 16 वर्ष तक राज संभाला। इस दौरान उन्होंने अनेक मंदिर, मठ, कुएं, बावड़ी तथा धर्मशालाएं बनवाईं।
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रानी दुर्गावती का नाम भारत की महानतम वीरांगनाओं की सबसे अग्रिम पंक्ति में आता है।
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कहते हैं कि रानी दुर्गावती की मृत्यु के पश्चात उनका देवर चन्द्रशाह शासक बना और उसने मुगलों की अधीनता स्वीकार कर ली थी।
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