शिक्षक दिवस पर रोचक कविता : साइकिल हाथ में, छाते के साथ में

गफूर स्नेही 
 
साइकिल हाथ में 
छाते के साथ में 
कपड़े की थैली है 
उजली मटमैली है 
कंधे पर बैग है 
वही मंथर वेग है 
खाना-पानी संग है 
उड़ा हुआ रंग है 
अफसर से तंग है 
नीति कर्म में जंग है 
गांव तो चाहता है 
विभाग न चाहता है 
बदली की धमकी है 
सरपंच की घुड़की है 
बच्चे कहते हैं 
रोक देंगे रस्ते हैं 
माएं दुआ देती 
बहुए घूंघट लेती 
निवृत्ति में बरस 
चार बाकी बस 
प्रमोशन न चाहते 
ऊंचाई न चाहते 
ये जमीन आन की 
वे हांके आसमान की 
शिक्षक आधी सदी 
नेकी एक न बदी। 

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