- ईशु शर्मा
आज के दौर में बढ़ती महंगाई को देखते हुए हमें कभी न कभी ये खयाल ज़रूर आया होगा कि भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) अनलिमिटेड नोट क्यों नहीं छापता है जिससे देश में बढ़ती महंगाई और गरीबी से राहत मिले? आपको बता दें कि RBI के ज़्यादा नोट छापने से देश की महंगाई कम नहीं बल्कि और ज़्यादा बढ़ जाएगी। इसलिए RBI अपनी मुद्रा नीति और वित्त मंत्रालय के अनुसार ही नोट छापता है। नोट छापने का कांसेप्ट पूरी तरह से सप्लाई और डिमांड पर निर्भर करता है और इस कांसेप्ट को आप एक उद्धरण के रूप में समझ सकते हैं-
1. मुद्रास्फीति (Inflation) : RBI के ज़्यादा नोट छापने के कारण अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति बढ़ सकती हैं क्योंकि देश में कैश फ्लो ज़्यादा होने के कारण डिमांड बढ़ेगी, पर सप्लाई सामान्य ही रहेगी जिसके कारण बाजार में महंगाई होगी।
3. न्यूनतम आरक्षित प्रणाली (Minimum Reserve System) : RBI 1956 से न्यूनतम आरक्षित प्रणाली के आधार पर नोट छापता है जिसमें RBI को नोट छापने के लिए न्यूनतम 200 करोड़ की राशि रिज़र्व करनी पड़ती है। यह राशि सोना व विदेशी मुद्रा के रूप में होती है। ज़्यादा नोट छापने के लिए ज़्यादा फंड की ज़रूरत होती है अगर ये न्यूनतम राशि नियंत्रित न हो तो अर्थव्यवस्था में संकट आ सकता है।