भारत का तीर्थस्थान कृष्णा नदी

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भारत में कृष्णा नदी का स्रोत महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में है। पश्तिम दिशा से यह नदी मुड़कर बंगाल की खाड़ी में बहती हुई आंध्र प्रदेश के हामासालादेवी से जा मिलती है

मान्यता है कि प्राचीन समय के राजा सत्वाहन एवं इशवाकू शासन काल में निर्मित राज्य के अंश स्मारकों के चित्र एवं कुछ प्रचीन वस्तुओं को सुरक्षित संग्रहालयों में रखा गया है। नदी के तट पर दत्तदेव का मंदिर स्थित है। संगमेश्वर शिव मंदिर, हरिपुर में स्थित है। कृष्णा नदी पर स्थित है कामकिंग मंदिर।

हजारों श्रद्धालु कृष्णा नदी की पूजा करने के लिए औद्मबर एवं नारासोमाबदी के दर्शन करते हैं। यहाँ के मंदिरों में देवी, देवताओं की पूजा अराधना होती है।

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कृष्णा नदी के तट पर एक प्रसिद्ध नगर विजयवाडा स्थित है। विजयवाडा के इंद्रा कुलादरी पहाड़ पर स्थित है मंदिर जिसमें कन्नका दुर्गा देवी की पूजा अराधना होती है। नवरात्रि पर्व के समय विजयवाडा में असंख्य श्रद्धालु इस मंदिर की पूजा करने के लिए आते हैं

बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए विजयवाडा बहुत प्रसिद्ध है। गुडिवाडा, घंटाशाला एवं अमरावती में हजारों श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए जाते हैं।

कृष्णा नदी में हरियाली एवं वनस्पति भरपूर है। घने जंगलों में आम के पेड़ मिलते हैं।
नगरजुनसागर में बाघ के संरक्षण अभ्यारण सेइलम में मिल रहे हैं। बाघ के सबसे बड़े संरक्षण यहाँ पर स्थित हैं। इस संरक्षण के चारों ओर नाल्लामलाई पहाड़ श्रृंखला स्थित हैं

  नगरजुनसागर में बाघ के संरक्षण अभ्यारण सेइलम में मिल रहे हैं। बाघ के सबसे बड़े संरक्षण यहाँ पर स्थित हैं।      
2002 में विजयवाडा के रेल विभाग ने कृष्णा नदी पर तीसरा रेल पुल बनाने की योजना बनाई थी जिससे यात्रा करने की सुविधा मिल सके। 42 करोड़ की लागत से इस पुल को बनाया जा रहा हैं। जिसे अठारह महीने में पूरा किया जाएगा।

आंध्र प्रदेश विभाग ने पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पैरासेल आयोजित किया है। पैरासेल के दौरान पर्यटक कृष्णा नदी की सैर करेंगे।

कृष्णा वन्य जीव अभयारण्य में मगरमच्छ, भिन्न रूप की मछलियाँ हैं एवं हिरण नजर आते हैं। यह अभयारण्य विजयवाडा से 80 किलोमीटर की दूरी पर गुंटूर क्षेत्र में स्थित है। चील, वैगटेल एवं पीपिट दिखाई देते है एवं भिन्न प्रकार के जानवर मिलते हैं