डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'

पत्रकार एवं स्तंभकार
शिक्षा की व्यवस्था हो चाहे व्यवस्था की शिक्षा दोनों की स्थिति में भाषा का महत्व सर्वविदित है। व्यावहारिक जीवन शैली...
भारत जैसे जनतांत्रिक देश में इस समय एक पर्व मनाया जा रहा है जिसे आम चुनाव कहते हैं। इस पर्व का उत्साह तो राजनीतिक लोगों...
अफरा-तफरी का दौर शुरू हो गया। आवाजाही पर संदेह शुरू है। बैंड-बाजा-बारात भी तैयार है। हर तरफ चुनावी शोर है। वादों की बौछार...
सरहद और संसद दोनों पर ही मानसिक हमला हुआ है। न केवल घाटी दहल गई बल्कि उसी के साथ भारत की वो पीढ़ी भी दहल रही है जिसके ख्वाबों...
हिन्दी भाषा भी वर्तमान में समृद्धशाली तो है, परंतु बड़े और झंडाबरदार लोगों के व्यामोह से ग्रसित भी है। हिन्दी का शाश्वत...
जो जिया हो भारत भारती के लिए, जिसने ताउम्र केवल राष्ट्र को जिया, कविता के शब्दों से संसद के गर्भगृह को सुशोभित किया हो,...
राजनीति की दशा और केंद्रीय कद में निर्णायक भूमिका में रहने वाले राज्य मध्यप्रदेश में चुनाव आ चुके हैं। मध्यप्रदेश...
भारत एक न केवल भूमि का टुकड़ा नहीं है बल्कि भारत के भारत होने के मतलब में ही भारतीयता संस्कार निहित है। संस्कार और संस्कृति...
भारत बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक समन्वय वाला राष्ट्र है, जहां 'कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर वाणी' बदल जाती है। किंतु...
इंटरनेट की इस दुनिया ने पाठकों की पहुंच और पठन की आदत दोनों ही बदल दी है। इसी के चलते प्रकाशन और लेखकों का नजरिया भी बदलने...