नौकरी छूटने पर कब और कितना EPF निकाल पाएंगे

शनिवार, 14 जुलाई 2018 (11:07 IST)
एंप्लॉयी प्रोविडेंट फंड यानी ईपीएफ़ के ज़रिए कर्मचारी प्रॉविडेंट फंड के तहत भविष्य के लिए धन सुरक्षित रखते हैं। हाल ही में इससे जुड़े नियमों कुछ बदलाव हुए हैं। आख़िऱ ईपीएफ है क्या और क्या हैं इसके नियम हैं और इन नियमों का आपके लिए क्या है मतलब। धंधा-पानी में आज चर्चा इन्हीं सवालों की।
 
 
कुछ साल पहले ईपीएफओ ने नियम बनाया था कि आंशिक निकासी बच्चे की शादी, उच्च शिक्षा और मकान खरीदने के लिए की जा सकती है। अब ईपीएफओ के नए नियम के मुताबिक, नौकरी छोड़ने के एक महीने बाद ही मेंबर्स 75 फीसदी धन की निकासी कर सकते हैं और 2 महीने बाद बचा हुआ 25 फीसदी हिस्सा भी निकाल सकते हैं। इससे पहले, नौकरी छोड़ने या बेरोजगार होने की स्थिति में दो महीने के बाद ही पीएफ़ की रकम निकाली जा सकती थी।
 
 
आख़िऱ ईपीएफ है क्या और क्या हैं इसके नियम हैं और इन नियमों का आपके लिए क्या है मतलब। धंधा-पानी में आज चर्चा इन्हीं सवालों की।
 
 
ईपीएफओ क्या है?
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफ़ओ की स्थापना 15 नवम्बर 1951 में हुई थी। कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय में उन सभी कार्यालयों और कंपनियों को रजिस्टर करना पड़ता है जहाँ पर 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं।
 
 
कैसे जमा होता है पैसा
जब कोई व्यक्ति किसी कंपनी में काम करना शुरू करता है तो उसकी बेसिक सैलरी का 12% उसकी सैलरी से काटा जाता है और इतना ही योगदान कंपनी की तरफ से दिया जाता है। व्यक्ति की सैलरी का 12% कर्मचारी ईपीएफ में जमा हो जाता है जबकि कंपनी द्वारा किया गए योगदान का केवल 3.67% ही इसमें जमा होता है बकाया का 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस में जमा हो जाता है।
 
 
क्या 12% से अधिक रकम भी कटा सकते हैं?
कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी के 12% से भी अधिक रकम कटवा सकता है। इसे वॉलियंटरी प्रोविडेंट फंड कहते हैं। इस पर भी टैक्स छूट मिलती है, लेकिन एंप्लॉयर यानी नियोक्ता सिर्फ़ बेसिक सैलरी का 12% कंट्रीब्यूशन ही देता है।
 
 
ईपीएफ़ पर कितना ब्याज?
कर्मचारियों की ईपीएफ की रकम पर उन्हें ब्याज मिलता है। जिसका निर्धारण सरकार और केन्द्रीय न्यासी बोर्ड करता है। वर्तमान वर्ष में दी जाने वाली ब्याज दर 8.55% है।
 
 
क्या नॉमिनेशन की सुविधा है?
जी हाँ, आप अपने ईपीएफ के लिए भी नॉमिनेशन सुविधा ले सकते हैं। कर्मचारी की मृत्यु होने की स्थिति में नॉमिनी को पीएफ का सारा पैसा दिया जाता है। अपने ईपीएफ अकाउंट के लिए नॉमिनी को चेंज भी कर सकते हैं।
 
 
पेंशन भी मिलती है क्या?
पीएफ़ में एम्पलॉयर का योगदान 12 फ़ीसदी ही होता है, लेकिन इसका एक हिस्सा 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन स्कीम में चला जाता है। पेंशन 58 साल की उम्र के बाद ही मिलती है।
 
 
नौकरी के 10 साल (लगातार) पूरे करने अनिवार्य हैं। न्यूनतम पेंशन 1000 रुपए है, जबकि अधिकतम पेंशन 3250 रुपये प्रतिमाह है। पेंशन ईपीएफ़ खाताधारक को आजीवन और उसके मरने के बाद आश्रित को दी जाती है।
 
 
एडवांस ले सकते हैं क्या?
नौकरी करते समय ईपीएफ का पैसा निकलने की इजाजत नहीं होती, लेकिन ऐसे कुछ खास मौके हैं जिनके लिए ईपीएफ की कुछ राशि निकाली जा सकती है, हालांकि इसके तहत भी आप पूरी राशि नहीं निकाल सकते।
 
 
अपने या परिवार (पति/पत्नी, बच्चे या डिपेंडेंट पेरेंट्स) के इलाज के लिए सैलरी की छह गुना रकम निकाल सकते हैं। अपनी, बच्चों की, या भाई-बहन की शादी या एजुकेशन के लिए पूरी रकम का 50 प्रतिशत निकाल सकते हैं। नौकरी के दौरान अधिकतम तीन बार ऐसा कर सकते हैं।
 
 
होमलोन चुकाने के लिए सैलरी का 36 गुना तक रकम निकालने की इजाज़त है। घर की मरम्मत के लिए सैलरी का 12 गुना तक रकम निकाल सकते हैं, लेकिन ये सुविधा सिर्फ़ एक बार मिलती है। इसके अलावा प्लॉट या घर खरीदने के लिए भी अपने ईपीएफ़ अकाउंट से पैसा निकाल सकते हैं।
 
 
ईपीएफ में पैसा कटवाने से मना कर सकते हैं क्या?
आप चौंकेंगे तो सही, लेकिन इसका जवाब हाँ है। अगर आपकी सैलेरी 15000 रुपए प्रति माह से ज्यादा है तो आप पीएफ में निवेश करने से मना कर सकते हैं। इसके लिए आपको नौकरी शुरू करने से पहले पीएफ फंड से बाहर रहने का विकल्प चुनना होगा।
 
 
अगर आप ऐसा करते हैं तो इसके लिए आपको फॉर्म नंबर 11 भरना पड़ता है। लेकिन अगर आप एक बार ईपीएफ का हिस्सा बन जाते हैं, तो फिर आप इससे बाहर नहीं आ सकते।
 

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