फुकरे 3 फिल्म समीक्षा : चूंचा के चुंचियापे से भरी बकवास फिल्म | Fukrey 3

समय ताम्रकर

गुरुवार, 28 सितम्बर 2023 (13:19 IST)
Fukrey 3 movie review फुकरे का तीसरा भाग हाजिर है। इसमें कोई बड़ा सितारा नहीं है फिर भी इस मूवी के पहले दो भाग बॉक्स ऑफिस पर सफल रहे थे। कामयाबी के पीछे लाली, चूचा, हनी, भोली पंजाबन, पंडितजी जैसे दिलचस्प किरदार रहे जिन्हें दर्शकों ने पसंद किया। लेकिन फुकरे 3 इस सीरिज की सबसे घटिया फिल्म है। टॉयलेट ह्यूमर पर आप एक-दो जोक्स को देख सकते हैं, लेकिन पूरी फिल्म नहीं। 
 
एक आदमी के पसीने और दूसरे आदमी के पेशाब को मिला दिया जाए तो वो पेट्रोल में परिवर्तित हो जाता है। इस आइडिए पर फिल्म बर्दाश्त करना बेहद मुश्किल है। निर्देशक मृगदीप सिंह लाम्बा और लेखक ने विपुल विज ने कॉमेडी के नाम पर अति कर दी। कॉमेडी के नाम पर छूट ली जा सकती है, लेकिन इतनी नहीं कि हजम ही न हो। 
 
फुकरे 2 जहां खत्म हुई थी वहां से फिर कहानी को आगे बढ़ाया गया है। भोली पंजाबन चुनाव लड़ती है और उसके सामने चूंचा खड़ा हो जाता है। चूंचे को रास्ते से हटाने के लिए साउथ अफ्रीका भेज दिया जाता है। सामान्य दर्शक भी इस प्लान को तुरंत समझ जाते हैं, लेकिन चालाक हनी को समझने में बहुत वक्त लगता है। 

 
इसके बाद कहानी फिर दिल्ली लौटती है और इतनी अजीबोगरीब हरकतें होती हैं कि दर्शक हैरान रह जाते हैं कि यह हो क्या रहा है? फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी जैसे काबिल प्रोड्यूसर्स ने इस प्रोजेक्ट को ग्रीन सिग्नल कैसे दे दिया? 
 
सुसु, पोटी, उल्टी को लेकर एक के बाद एक सीन रखे गए हैं कि उबकाई आने लगती है। न जाने क्या सोचकर इतने सारे दृश्यों की भरमार कर दी गई। कहानी के नाम पर कुछ भी नहीं है और स्क्रीनप्ले बकवास है।
 
आजकल हर फिल्म में मैसेज देना फिल्मकारों ने जरूरी समझ लिया है। 'फुकरे 3' में पानी की कमी होगी तो क्या होगा? पानी माफिया किस तरह अपना जाल बुन रहे हैं? जैसे मुद्दों को छूने की नाकाम कोशिश की गई है। ढंग से दर्शकों को एंटरटेन तो कर नहीं पाए और बेवजह के मुद्दे उठाने की कोशिश में औंधे मुंह गिर गए।  
 
चूंचा के किरदार पर जरूरत से ज्यादा फोकस किया गया जिसमें भोली पंजाबन, हनी और पंडितजी खो गए। चूंचा की बेवकूफनामा हरकतें कब तक दर्शकों का दिल बहला सकती है। 


 
फिल्म के किरदार दर्शकों में लोकप्रिय हैं, लेकिन ठोस कहानी के अभाव में ये कैरेक्टर्स जूझते नजर आए। निर्देशक मृगदीप सिंह लाम्बा की इस फिल्म में वो तत्व नदारद दिखे जो इस सीरिज की पहचान है। कॉमेडी के नाम पर उन्होंने कुछ भी उठा कर पेश कर दिया है। 
 
फिल्म वरुण शर्मा को ही कुछ करने का मौका देती है जिसका उन्होंने फायदा उठाया। पुलकित सम्राट साइडलाइन पर नजर आए। मनजोत सिंह को और सीन मिलना चाहिए थे क्योंकि उनकी कॉमिक टाइमिंग जोरदार है। पंकज त्रिपाठी ज्यादातर समय दूसरे किरदारों के संवादों पर एक्सप्रेशन्स देते ही नजर आए। रिचा चड्ढा की एक्टिंग अच्छी है। 
 
दो-चार बार हंसने के लिए 'फुकरे 3' का टिकट खरीदना बेहद महंगा सौदा है। 
 

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