देश में एक ओर कोरोना महामारी की दूसरी लहर की चपेट में है तो दूसरी ओर कोरोना वायरस से बचाने वाली एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कोवीशील्ड सवालों के घेरे में आ गई है। कोवीशील्ड वैक्सीन को लेकर संदेह इसलिए उठ रहा है कि फ्रांस, जर्मनी और स्पेन समेत कई यूरोपीय देशों का एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इन देशों ने वैक्सीन पर रोक लगाने का कारण बताते हुए कहा है कि वैक्सीन का डोज लेने के बाद कुछ लोगों में ब्लड क्लॉट्स का बनाना बताया है।
वेबदुनिया से बातचीत में डॉक्टर रमन गंगाखेडकर कहते हैं एस्ट्राजेनेका को विश्व के खासकर यूरोप के कुछ देशों में वैक्सीन का डोज लेने के बाद थ्रोम्बोएम्बोलिज्म (खून के अंदर थक्के जमने) की कथित शिकायत के बाद रोक लगा दी है। जिन देशों ने वैक्सीन पर रोक लगाई है वहां पर 50 लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन की डोज लग चुकी है। ऐसे में अब जो कथित रुप से शिकायत की बात आई है वह मात्र 37 लोगों में आई है।
वैक्सीन के खतरे से ज्यादा फायदा- 'वेबदुनिया' से बातचीत में डॉक्टर रमन गंगाखेडकर कहते हैं कि हमें यह समझना चाहिए कि हमें कोविशील्ड और कोवैक्सीन जो मिल रही है उसको हमको जल्द से जल्द लगवाना है। वैक्सीन लगने वाले हर व्यक्ति को यह भी याद रखना होगा कि वैक्सीन मुझे मौत से बचाएगी इंफेक्शन से नहीं। वह कहते हैं कि वैक्सीनेशन के बाद भी इंफेक्शन के चांस है। अगर 100 लोगों को वैक्सीन लग चुकी है तो उसमें 80 से 90 फीसदी लोगों को सीवियर इंफेक्शन नहीं होगा और मौत नहीं होगी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इन 80 लोगों को इंफेक्शन नहीं होगा, इंफेक्शन के चांस रहेंगे लेकिन बहुत माइल्ड है।
यूरोप में भी एस्ट्राजेनेका को क्लीन चिट- उधर यूरोपीय संघ की औषधि नियामक संस्था यूरोपियन मेडिकल एजेंसी ने गुरुवार को एस्ट्राजेनेका के कोरोना वैक्सीन को क्लीन चिट देते हुए कहा कि इस टीके से खून के थक्के जमने का खतरा नहीं है और इसके इस्तेमाल के फायदे खतरे से ज्यादा हैं। एजेंसी के प्रमुख एमर कुक ने कहा, 'हमारी वैज्ञानिक राय यह है कि यह टीका लोगों को कोविड-19 से बचाने में सुरक्षित और प्रभावी है।'