ओणम का सबसे बड़ा महत्व पौराणिक कथा से जुड़ा है। यह त्योहार असुर राजा महाबलि (Mahabali) की वापसी का प्रतीक है, जो एक न्यायप्रिय और दयालु शासक थे। माना जाता है कि उनके शासनकाल में केरल में कोई दुख या गरीबी नहीं थी। देवता उनकी बढ़ती लोकप्रियता से चिंतित हो गए और उन्होंने भगवान विष्णु से सहायता मांगी।
तब भगवान विष्णु ने वामन (Vamana) अवतार लिया और राजा महाबलि से तीन पग भूमि दान में मांगी। महाबलि ने दान दे दिया। पहले पग में भगवान वामन ने पूरी पृथ्वी नाप ली, दूसरे पग में स्वर्ग लोक को और तीसरे पग के लिए कोई जगह नहीं बची तो महाबलि ने अपना सिर आगे कर दिया। भगवान वामन ने तीसरे पग को महाबलि के सिर पर रखकर उन्हें पाताल लोक भेज दिया।
2. थिरुवोनम (Thiruvonam): यह ओणम का दसवां और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन राजा महाबलि का स्वागत किया जाता है। लोग नए कपड़े पहनते हैं, जिन्हें 'ओणम कोडी' (Onam Kodi) कहते हैं। घरों को सजाया जाता है और भगवान वामन व राजा महाबलि की मिट्टी की मूर्तियां बनाई जाती हैं।
ओणम का सबसे खास आकर्षण 'ओणम सद्या' (Onam Sadya) है। यह एक भव्य पारंपरिक दावत होती है, जिसमें 24 से अधिक स्वादिष्ट शाकाहारी व्यंजन केले के पत्ते पर परोसे जाते हैं। इस दावत में अवियल, सांबर, पायसम, इडली, और विभिन्न तरह की सब्ज़ियां शामिल होती हैं। इस दावत को पूरा परिवार और दोस्त मिलकर खाते हैं।
त्योहार के दौरान कई पारंपरिक खेल और गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं, जैसे 'पुलिकली' (Pulikali) (बाघ नृत्य), 'वलम काली' (Vallam Kali) (नाव प्रतियोगिता), और पारंपरिक लोक नृत्य। कुल मिलाकर, ओणम सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि यह केरल के लोगों के लिए खुशियों, समृद्धि, और आपसी भाईचारे का संदेश लेकर आता है। यह हमें राजा महाबलि की याद दिलाता है और हमें दान, करुणा, और सद्भाव का महत्व सिखाता है।