चाणक्य की अनमोल और आदर्श सीख

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* आचार्य चाणक्य करते हैं कि आपत्तिकाल के लिए धन की रक्षा करनी चाहिए। धन से स्त्री की रक्षा करनी चाहिए। धन और स्त्री से हर समय अपनी रक्षा करनी चाहिए।



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* मनुष्य को चाहिए कि वह प्रति‍दिन एक श्लोक यानी वेदमंत्र अथवा एक अक्षर का स्वाध्याय करें और दान धर्म के शुभ कर्मों को करता हुआ दिन को सफल बनाए, दिन को व्यर्थ न गंवाए।


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* मूर्ख शिष्य को पढ़ाने से, दुष्ट स्त्री का भरण-पोषण करने और दुखीजनों के साथ व्यवहार करने से बुद्धिमान मनुष्य भी दुख ही उठाता है।


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* राजा, गुरु, मित्र की पत्नी तथा सास माता के समान होती है। इनसे अवैध संबंध रखने वाला महापापी होता है।


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* जो स्त्री अपने पति की आज्ञा के विरुद्ध उपवास-व्रत करती है, वह अपने पति की आयु को कम करती है और अंतत: घोर नरक में जाती है।


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* पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों का आहार दो गुना, लज्जा चौगुनी, साहस छह गुना और काम-वासना आठ गुना अधिक होती है




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