Yashasvi Jaiswal की दुःखभरी कहानी जिसे पढ़कर भर आएगी आपकी आंखें

कृति शर्मा

शनिवार, 3 फ़रवरी 2024 (16:06 IST)
Yashasvi Jaiswal Life Struggle Story : वो कहते हैं न जिस दिन इंसान कुछ कर दिखाता है तो सभी उसका गुणगान करने लगते हैं उसके पहले की कहानी किसी को नहीं मालूम होती, वो कैसे आगे बढ़ा, उसने यहाँ तक आने को कितनी मुश्किलों का सामना किया, कितने दुःख देखे, लोग उस वक्त कुछ नहीं देखते बस देखते हैं तो उसकी सफलता लेकिन अगर उस इंसान को अच्छे से जानना हो तो यह सब जानना जरुरी होता है क्योंकि यही चीज़ें होती है जो उसे वो बनती है जो वो आज सबके सामने बड़े मंच पर है।

यशस्वी जायसवाल जिनका नाम उनके इंग्लैंड के खिलाफ दोहरा शतक बनाने के बाद हर एक की जुबां पर है उनकी जिंदगी के रास्तों ने उनका बहुत इम्तेहां लिया है। उन्हें यहाँ तक आने के लिए कई कठिन रास्तों से गुजरना पड़ा है। उत्तर प्रदेश के भदोही के रहने वाले निम्न मध्यमवर्गीय परिवार के लड़के जायसवाल की जिंदगी मुश्किलों से भरी रही है।  वह 11 साल की उम्र में प्रतिष्ठित आजाद मैदान में ट्रेनिंग लेने के लिए भदोही से मुंबई आए थे। उन्होंने खुद छोटे-मोटे काम करके अपना गुजारा किया, जिसमें सड़क के किनारे पानी पूरी बेचना भी शामिल था। वह अपने शुरूआती वर्षों के दौरान आजाद मैदान के मैदानकर्मियों के साथ टेंट में भी रहे।

बंजारे की तरह टेंट में रातें गुजारना भयानक अनुभव था। लाइट नहीं होती थी। पैसे इतने थे नहीं कि किसी बेहतर जगह जा सकें। यही नहीं, मैदान पर बने टेंट में आसरे के लिए भी उन्हें मेहनत करनी पड़ी। 
 
उनकी लाइफ का 'टर्निंग पॉइंट'
यशस्वी का संघर्ष और भी लंबा होता, लेकिन यहां उनकी जिंदगी में एक कोच की एंट्री हुई और फिर उनके रास्ते कुछ सरल हुए। 2013 दिसंबर में कोच ज्वाला सिंह की मुलाकात यशस्वी से हुई।

कोच बताते हैं- जब मैं उनसे मिला तो मुझे उसमें अपनी छवि दिखाई दी। मैं भी गोरखपुर से ऐसे ही क्रिकेटर बनने आया था। रमाकांत आचरेकर सर के पास क्रिकेट के ककहरे सीखे। उस दौरान एक-एक रूपए के लिए भटका। लेकिन जब मैं यशस्वी से मिला तो मैंने ठाना कि यह बच्चा ज्वाला (मेरी तरह) की तरह क्रिकेटर बनने से चूकना नहीं चाहिए। मैंने उसे अपने पास अपने घर में रखने का फैसला किया।
 
 
ज्वाला बताते हैं- यशस्वी को 2013 से 2022 तक अपने पास रखा। इस दौरान हमने हर अनुभव को एक साथ झेला। यशस्वी के यहां तक पहुंचने में जितनी मेरी भूमिका है उतना ही श्रेय मुंबई क्रिकेट असोसिएशन और राजस्थान रॉयल्स को भी श्रेय जाता है। मुझे याद है यशस्वी जब पहली बार मिला था तो उसमें कुछ खास था। बता दें कि यशस्वी के लिए पहला आईपीएल सीजन कुछ खास नहीं रहा था, लेकिन इसके बावजूद फ्रेंचाइजी ने युवा ओपनर को टीम में बनाए रखा। दूसरी ओर, शुरुआती रणजी मैचों में कुछ खास नहीं करने के बावजूद मुंबई टीम ने लगातार उन्हें टीम के साथ रखा और ग्रूम किया।
 
वह 2020 में अंडर-19 विश्व कप (U-19 World Cup) में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी के तौर पर उभरने के बाद सुर्खियों में आए थे। उसी साल राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की नीलामी में उन्हें अपनी टीम से जोड़ा। उन्होंने आईपीएल में 37 मैचों में 1172 रन आए है। जायसवाल ने टी20 अंतरराष्ट्रीय में 17 मैचों में 502 रन बनाए है।
 
 
जंग के मैदान में अकेला शूरवीर 
 मैदान में वे सबसे पहले बैटिंग करने आए और एक शूरवीर की तरह अंत तक आखरी तक खड़े रहे। उनके टीम के किसी साथ ने उनका ज्यादा वक्त तक मैदान में साथ नहीं दिया लेकिन वे धीरज के साथ वहां खड़े रहे और इंग्लैंड की घातक गेंदबाजी का सामना करते रहे और ऐसा नहीं है कि उन्होंने उस दौरान जोखिम नहीं उठाए, उन्हें जब मौका मिला उन्होंने अपना नेचुरल गेम खेला जो आक्रामक है। अगर वे जोखिम न उठाते तो शायद जो हमने उन्हें करते देखा वो न कर पाते।  
 
Yashasvi Jaiswal इंग्लैंड के खिलाफ पहले मैच में हैदराबाद में भी कुछ इसी अंदाज में खेला था लेकिन वे शतक तक नहीं पहुंच पाए थे, 80 पर ही आउट हो गए थे। लेकिन उन्होंने अपनी लय को बरकरार रखा और आज देखिए 22 साल की उम्र में अपने करियर का सिर्फ छठा ही टेस्ट खेलते हुए उन्होंने इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के सामने दोहरा शतक जड़ अपने नाम कई रिकार्ड कर लिए हैं।  
 
Yashasvi Jasiwal के नाम हुए Records
 
टेस्ट में दोहरा शतक जब किसी अन्य खिलाड़ी ने अर्धशतक न बनाया हो
(Double Centuries in Test when no other player scored fifty)
 
231 - Nourse vs AUS (1935)
202 - Hutton vs WI (1950)
206 - A Morris vs ENG (1951)
262 - Amiss vs WI (1974)
216 - Atapattu vs ZIM (1999)
226 - Lara vs AUS (2005)
209 - Yashasvi vs ENG (2024)*


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