लोकसभा चुनाव से पहले मध्यप्रदेश में 'ब्यूटी' पोलिटिक्स

भोपाल। चुनाव से पहले कई तरह की पोलिटिक्स देखने को मिलती है, कभी बड़े नेताओं के पाला बदलने की पोलिटिक्स, कभी नेताओं के बयानों की पोलिटिक्स तो कभी सियासत में जाति की पोलिटिक्स, लेकिन इस बार लोकसभा चुनाव से पहले मध्यप्रदेश की सियासत में ब्यूटी पोलिटिक्स देखने को मिल रही है।


लोकसभा चुनाव से पहले भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पहले प्रियंका गांधी को भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाने की मांग की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की इस मांग के अगले दिन ही प्रियंका गांधी को कांग्रेस पार्टी का महासचिव बना दिया गया। इसके बाद अब लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में प्रियंका गांधी को मध्यप्रदेश में किसी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ाने और उनकी अधिक से अधिक रैली कराने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। इस बीच गुना-शिवपुरी संसदीय सीट से कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया को चुनाव लड़ाने की मांग कार्यकर्ताओं ने उठाई दी है।

एक ओर कांग्रेस कार्यकर्ता प्रियंका गांधी और प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया को चुनाव लड़ाने की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर बीजेपी नेता कांग्रेस के चेहरों पर निशाना साध रहे हैं। बीजेपी नेता अपने बयानों के जरिए कहीं न कहीं प्रियंका गांधी के चेहरे पर सवाल उठा रहे हैं। पहले जहां बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने प्रियंका पर निशाना साधा तो अब मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने प्रियंका गांधी के चेहरे पर सवाल उठाए हैं।

गोपाल भार्गव का कहना है कि अगर प्लास्टिक सर्जरी कराने से वोट मिलते हैं तो नेताओं को प्लास्टिक सर्जरी करवा लेनी चाहिए। गोपाल भार्गव ने प्रियंका गांधी के कांग्रेस में आने से वोटरों पर प्रभाव पड़ने के बारे में पूछा गया तो गोपाल भार्गव ने कहा कि अगर हिंदुस्तान में कर्म और सुशासन पर वोट न मिलकर चेहरे के आधार पर वोट मिलने लगें तो उनकी सभी नेताओं को सलाह होगी कि वो प्लास्टिक सर्जरी करवा लें।

प्रियंका गांधी के देश की राजनीति में योगदान देने पर सवाल खड़े करते हुए गोपाल भार्गव ने पूछा कि प्रियंका और उनके पति ने देश की सियासत में क्या योगदान दिया, यह बताया जाए। गोपाल भार्गव ने कहा कि अगर चेहरे के आधार पर वोट मिल रहे होते तो पीएम मोदी भी सफेद दाढ़ी को डाई करा लेते, लेकिन वो जानते हैं कि कामों के आधार जनता वोट देती है। चेहरे के आधार पर जनता वोट नहीं देती है।

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