शिप्रा में स्नान कर शनिदेव को पूजा

रविवार, 31 अगस्त 2008 (01:10 IST)
NDND
धार्मिक नगरी उज्जैन में शनिवार को शनिश्चरी अमावस्या पर हजारों श्रद्वालुओं ने क्षिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट पर स्नान किया और प्राचीन नवग्रह शनि मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान पनौती स्वरूप अपने जूते-चप्पल भी छोड़े गए।

पवित्र क्षिप्रा नदी के किनारे शनि ग्रह मंदिर में पूजा के लिए श्रद्धालु शुक्रवार रात्रि से ही पहुँचना शुरू हो गए थे। श्रद्धालुओं ने स्नान कर नवग्रह मंदिर में शनि महाराज को पूजा-अर्चना कर तेल चढ़ाया। प्राचीन मान्यतानुसार श्रद्वलुओं ने धारण किए हुए कपड़े व जूते-चप्पल मंदिर के आसपास छोड़े। आज तड़के से शाम तक शनि भगवान को सैकड़ों लीटर तेल चढ़ाया गया। श्रद्धालुओं में ग्रामीण लोग ज्यादा थे।

उल्लेखनीय है कि यहाँ स्थित प्राचीन एवं पौराणिक शनि मंदिर में वर्षभर कष्ट निवारण के लिए समय-समय पर श्रद्धालु आते हैं और साढ़े साती की दशा से मुक्ति के लिए मंत्रजाप कर मंदिर में स्थित नवग्रह के रूप में स्थित शिवलिंग की पूजा करते हैं।

प्रातः चार बजे ही होगी भस्मार्ती : बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्मार्ती पूर्वानुसार प्रातः चार बजे से शुरू होगी। प्रबंध समिति ने शनिवार को कहा मंदिर में श्रावण व भादौ मास में भीड़ होने के कारण भस्मार्ती समय में परिवर्तन किया गया था। इस दौरान तड़ेके साढ़े तीन बजे से आरती होती थी, जो अब शनिश्चरी अमावस्या पर्व के पश्चात कल 31 अगस्त से पूर्वानुसार प्रातः चार बजे से होगी।

उल्लेखनीय है कि भगवान महाकालेश्वर मंदिर देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहाँ प्राचीन काल से प्रतिदिन तड़के भस्म आरती होती है। हालाँकि पुराने समय में यह भस्मार्ती ताजा मुर्दे की भस्म से की जाती थी, जो काफी पहले बंद हो चुकी है, लेकिन अब भस्म आरती गाय के गोबर से बने अरडे कंडे की भस्म बनाकर व मंत्रोचार कर आरती के लिए भस्म तैयार की जाती है।

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