आईटी और आईटी आधारित सेवाओं, ई-वाणिज्य, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, डिजिटल भुगतान और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मौजूद अरबों डॉलर के अवसरों को प्रमुखता से रखते हुए उन्होंने कहा कि 1 हजार अरब डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था कोई बहुत लंबा-चौड़ा दावा नहीं है।
कानून एवं आईटी मंत्री ने यहां प्रौद्योगिकी जगत के उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे कोई संदेह नहीं है कि यह 7 साल में 1 हजार अरब डॉलर हो जाएगा, लेकिन मेरा विनम्र अनुरोध है कि 7 साल तक इंतजार क्यों किया जाए। क्या हम यह 3-4 साल में नहीं कर सकते हैं?
डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने पर आयोजित इस बैठक में नैस्कॉम के प्रेसिडेंट आर. चन्द्रशेखर, गूगल इंडिया के राजन आनंदन, विप्रो के रिशद प्रेमजी, इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज मोहिंद्रू, इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सुभो राय और हाइक मैसेंजर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी केविन भारती मित्तल आदि शामिल हैं।
प्रसाद ने कहा कि भारतीय आईटी क्षेत्र राजस्व में 10 लाख करोड़ को पार कर गया है और निर्यात भी 7.5 लाख करोड़ रुपए को पार कर चुका है। देश को डिजिटल विकास के लिए अपना मॉडल बनाने की जरूरत है, जो समावेशी हो।
उन्होंने कहा कि ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित कीजिए, जो सस्ती हो। ऐसा बुनियादी ढांचा विकसित कीजिए, जो विकासोन्मुखी हो और ऐसा माहौल बनाइए, जो समावेशी हो। (भाषा)