भगवान श्री गणपति जी की आरती | Bhagwan ganpati ki aarti

Ganpati ji ki Aarti in hindi: गणेशजी  की यूं तो जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति और जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा...वाली आरती बहुत लोकप्रिय है, परंतु इसके अवाला भी उनकी कई प्रमाणिक और पौराणिक आरतियां हैं। उन्हीं में से एक गणपति आरती पढ़ें सिर्फ वेबदुनिया पर।
 
 
भगवान् श्रीगणपति जी की आरती | bhagwan ganpati ki aarti
 
श्रीगनपति भज प्रकट पार्वती
 
श्री गनपति भज प्रगट पार्वती,
अंक बिराजत अविनासी।
ब्रह्मा-बिष्नु-सिवादि सकल सुर,
करत आरती उल्लासी।।
 
त्रिसूलधरको भाग्य मानिकैं,
सब जुरि आये कैलासी।
करत ध्यान, गंधर्व गान-रत,
पुष्पनकी हो वर्षा-सी।।
 
धनि भवानि व्रत साधि लह्यो जिन,
पुत्र परम गोलोकासी।
अचल अनादि अखंड परात्पर,
भक्तहेतु भव पर-कासी।।
 
विद्या-बुद्धि-निधान गुनाकर,
बिघ्नबिनासन दुखनासी।
तुष्टि पुष्टि सुभ लाभ लक्ष्मि संग,
रिद्धि सिद्धि-सी हैं दासी।।
 
सब कारज जग होत सिद्ध सुभ,
द्वादस नाम कहे छासी।
कामधेनु चिंतामनि सुरतरु,
चार पदारथ देतासी।।
 
गज-आनन सुभ सदन रदन इक,
सुंडि ढुंढि पुर पूजा-सी।
चार भुजा मोदक-करतल सजि,
अंकुस धारत फरसा-सी।।
 
ब्याल सूत्र त्रयनेत्र भाल ससि,
उन्दुरवाहन सुखरासी।
जिनके सुमिरन सेवन करते,
टूट जात जम की फांसी।।
 
कृष्णपाल धरि ध्यान निरन्तर,
मन लगाय जो कोइ गासी।
दूर करैं भवकी बाधा प्रभु,
मुक्ति जन्म निजपद पासी।।
 
संदर्भ : आरती संग्रह गीता प्रेस गोरखपुर

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