राहुल गांधी ने खेला आदिवासी दांव

सोमवार, 31 मार्च 2014 (21:53 IST)
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उमरकोट (ओड़िशा)। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को दावा किया कि उनकी पार्टी आदिवासियों की हिमायती है और उसने नियमगिरि पहाड़ियों को बचाया था। गांधी ने आरोप लगाया कि ओड़िशा की बीजद सरकार को खनन माफिया चला रहा है।

गांधी ने आदिवासी बहुल कोरापुट और नबरंगपुर संसदीय क्षेत्रों में दो जनसभाओं को संबोधित करते हुए दावा किया, कांग्रेस हमेशा से ही आदिवासियों के साथ रही है और उसने उनके विकास के लिए काम किया है। मेरे परिवार का आदिवासियों के साथ विशेष लगाव रहा है।

उन्होंने कहा कि वह उनकी पार्टी थी जिसने कालाहांडी के आदिवासियों के लिए लड़ाई लड़ी और नियमगिरि पहाड़ी और उनके लोगों को बचाया। बीजद सरकार पवित्र पहाड़ी को एक कंपनी को सौंपने की योजना बना रही थी।

गांधी अप्रत्यक्ष तौर पर सरकार द्वारा वेदांत रिसोर्सेस पीएलसी के नियमगिरि पहाड़ी पर बाक्साइट खान विकसित करने के प्रस्ताव को खारिज करने का उल्लेख कर रहे थे जो आदिवासियों के लिए पवित्र माना जाता है। 12 ग्रामसभाओं ने भी नियमगिरि पर बाक्साइट खनन की योजना को खारिज कर दिया था।

गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा कि उस खनिज को माफिया लूट रहे हैं जिस पर आदिवासियों का अधिकार है। उन्होंने कहा, राज्य सरकार को खनन माफिया चला रहे हैं नेता नहीं। हजारों करोड़ रुपए के बहुमूल्य खनिज की लूट हो रही है और राज्य सरकार को इसकी जानकारी है।

उन्होंने कहा कि कुछ मुट्ठीभर माफिया राज्य का खनिज संसाधन लूटकर अमीर बन रहे हैं, गरीब और आदिवासियों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने लोगों के लिए बड़ी संख्या में संस्थान, मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोले हैं।

गांधी ने कहा कि उनके परिवार का आदिवासियों के साथ पुराना संबंध रहा है। मुझे आदिवासियों के बीच अच्छा लगता है। उन्होंने याद करते हुए कहा कि उनके पिता राजीव गांधी ने भी इस क्षेत्र का दौरा किया था और उनमें यहां के लोगों के प्रति लगाव था।

उन्होंने कहा कि वे ‘दिल्ली दरबार’ में आदिवासियों के हितों के लिए लड़ाई लड़ते रहेंगे। उन्होंने बीजद सरकार पर आदिवासी विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा, यद्यपि केंद्र हजारों करोड़ रुपए आदिवासियों के कल्याण के लिए भेजता है, यह गांव स्तर पर लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। राज्य सरकार केंद्रीय धनराशि को दूसरी ओर लगा रही है और बिना किसी औचित्य के श्रेय ले रही है।

गांधी ने एक उदाहरण देते हुए कहा, हम आदिवासी उप योजना के तहत धनराशि देते हैं लेकिन राज्य सरकार धनराशि का इस्तेमाल एक परिवहन इमारत निर्माण के लिए करती है। उन्होंने बीजद सरकार पर किसानों और आदिवासियों के लिए जमीन और पानी को दूसरी ओर मोड़ने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, हम उद्योगों के लिए पानी और जमीन के खिलाफ नहीं हैं लेकिन दोनों के बीच एक संतुलन होना चाहिए। ओड़िशा सरकार उद्योगों को पानी किसानों की कीमत पर मुहैया करा रही है। उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार ने राजनीतिक दलों के विरोध के बावजूद 70 हजार करोड़ रुपए का ॠण माफ कर दिया था।

उन्होंने कहा, हमारा मानना है कि किसानों की मदद और कुछ नहीं बल्कि भारत के विकास में मदद करना है। उन्होंने भूमि अधिग्रहण कानून पर कहा कि यह भूमि गंवाने वाले गरीब और आदिवासियों को तीन गुना अधिक कीमत दिलाएगा।

गांधी ने चिट फंड जैसे भ्रष्टाचार के मुद्दे भी उठाए और आरोप लगाया कि सत्ताधारी बीजद नेता उन फर्जी निवेश कंपनियों के पीछे थे जिन्होंने गरीब निवेशकों से उनकी कड़ी मेहनत की कमाई ठग ली। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेसनीत संप्रग सरकार की मनरेगा और रोजगार गारंटी योजनाओं के कारण ही 15 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठे।

उन्होंने आरोप लगाया, संप्रग सरकार ने खाद्य सुरक्षा कानून बनाया, लेकिन आपकी राज्य सरकार ने उसे क्रियान्वित नहीं किया। गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी यदि सत्ता में आई तो वे राज्य विधानसभाओं और संसद में 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने को प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने कहा, हम विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए कोटा लाना चाहते हैं लेकिन कुछ पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं। उन्होंने वादा किया कि संप्रग सरकार नबरंगपुर में रेलवे लाइन के साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सुनिश्चित करेगी। (भाषा)

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