<img style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-03/02/full/1772447447-7079.jpg" align="center" title="bhavishya malika ki bhavishyavani" width="1200" height="675" alt="The picture shows an open book with the Janannath Temple in the background, with the caption, " bhavishya="" malika's="" predictions.""="">
Bhavishya malikabhavishya malika in hindi: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच एक बार फिर प्राचीन ग्रंथ भविष्य मालिका चर्चा में आ गई है। सोशल मीडिया पर लोग दावा कर रहे हैं कि ईरान-इज़राइल युद्ध को लेकर भविष्य मालिका में पहले ही संकेत दिए जा चुके थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है- क्या अब वही भविष्यवाणियां सच होने का समय आ गया है?
ओड़िसा के संत अच्युतानंद दास ने कई मालिकाएं लिखी हैं जिसमें से भविष्य की घटनाओं को अलग से संकलित करके एक भविष्य मालिका नाम से ग्रंथ प्रचलित है। कहते हैं कि संत अच्युतानंद दास ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर को केंद्र में रखकर कई भविष्यवाणियां की है। उनकी भविष्यवाणियों पर आधारित एक किताब भविष्य मालिका पुराण नाम से इंटरनेट पर प्रचलित है, जो कथावाचक पंडित काशीनाथ मिश्र जी द्वारा लिखी बताई जा रही है। इस ग्रंथ के अनुसार दुनिया में यह परिवर्तन का युग चल रहा है।
ईरान-इज़राइल युद्ध क्यों बना वैश्विक चिंता का विषय?
ईरान और इज़राइल के बीच वर्षों से राजनीतिक और सैन्य तनाव चला आ रहा है। हाल के महीनों में मिसाइल हमले, सैन्य जवाबी कार्रवाई और कूटनीतिक बयानबाजी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष खुली जंग में बदलता है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
भविष्य मालिका में क्या कहा गया है?
भविष्य मालिका एक प्राचीन भविष्यवाणी ग्रंथ माना जाता है, जिसमें कलियुग के अंत समय से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख किया गया है। कुछ व्याख्याओं के अनुसार इसमें कहा गया है कि-
पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध होंगे
कई राष्ट्र आपस में टकराएंगे
भारत पर 13 देश मिलकर आक्रमण करेंगे
भारत में मिलेट्री शासन लगेगा
पाकिस्तान का नामोनिशान मिट जाएगा
धार्मिक स्थलों को लेकर संघर्ष बढ़ेगा
और इससे पूरी दुनिया में अशांति फैलेगी
7 दिन तक धरती पर अंधेरा छा जाएगा
शनि का गोचर मचाएगा तबाही:
भविष्य मालिका के अनुसार जब शनि मकर और फिर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे तब महाविनाश का प्रारंभ होगा। शनि ने वर्ष 2020 को मकर में गोचर किया था। फिर ढाई साल बाद शनि ने 29 अप्रैल 2022 को ही कुंभ में प्रवेश किया था। फिर शनि वक्री होकर 12 जुलाई 2022 को मकर राशि में गोचर किया था। इस दौरान महायुद्ध की नींव पड़ जाने का संकेत किया गया था। शनि उसके बाद जब 17 जनवरी 2023 को शनि पुन: कुंभ में आएंगे और 29 मार्च 2025 तक यहीं रहेंगे। इस दौरान तीसरे विश्वयुद्ध से महाविनाश का पहला चरण प्रारंभ होगा। उसके बाद 29 मार्च 2025 से 23 फरवरी 2028 तक शनि मार्गी और वक्री होकर मीन राशि में रहेंगे। तब जनता त्राहि-त्राहि करने लगेगी। फिर 23 फरवरी 2028 से 17 अप्रैल 2030 तक शनि मेष राशि में रहेंगे तब महाविनाश चारों ओर नजर आएगा। 2030 के बाद सभी देश शांति की बात करेंगे, लेकिन तब तक करोड़ों लोग मारे जा चुके होंगे।
तीसरे विश्वयुद्ध में विजेता होगा भारत:
भविष्य मालिका के अनुसार 2026 में तीसरा विश्व युद्ध प्रारंभ होगा। जब गगन गादी पर होंगे और उड़ीसा के दिव्य सिंह राजा गादी पर होंगे तब भारत पर आक्रमण होगा। तीसरा विश्वयुद्ध 6 साल 6 माह तक चलेगा। चीन 13 मुस्लिम देशों के साथ मिलकर भारत पर हमला कर देगा। आखिरी के 13 माह भारत युद्ध में शामिल होगा और यह भारत की लड़ाई होगी। भारत की इसमें विजय होगी। भारत सदा के लिए अपने दुश्मनों को न सिर्फ खत्म कर देगा बल्कि विश्व गुरु भी बन जाएगा। पाकिस्तान और बांग्लादेश का नामोनिशान मिट जाएगा। कई देशों का भूगोल बदल जाएगा।
एक संत का होगा भारत पर शासन:
शनि मीन योग में एक संत के हाथों में होगी देश की बागडोर जो अविवाहित होगा। वही संपूर्ण क्षत्रप होगा। उसमें विश्व का नेतृत्व करने की अद्भुत क्षमता होगी और वह धर्म के सहारे शांति स्थापित कर पाएगा। भारत का आखिरी राजा एक शक्तिशाली हिन्दू राजा होगा, जो योगी पुरुष होगा और जिसकी कोई संतान नहीं होगी। उसमें विश्व का नेतृत्व करने की अद्भुत क्षमता होगी और वह धर्म के सहारे शांति स्थापित कर पाएगा। अच्युतानंद महाराज ने 500 साल पहले ही बताया दिया था कि जब मंदिर की गादी पर गगन नामक सेवक होंगे और ओड़िसा के दिव्यसिंह राजा गादी पर होंगे तब भारत पर आक्रमण होगा। ओड़िशा पर जो बम गिराएं जाएंगे वह काम नहीं करेंगे। भारत ही अंत में जीत जाएगा। उस वक्त भारत की बागडोर एक संत के हाथों में होगी जो अविवाहित होगा। वही संपूर्ण क्षत्रप होगा।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में ओड़िसा के राजा दिव्यसिंह गजपति गादी पर विराजमान हैं और गगन नामक सेवक भी जगन्नाथ मंदिर की गादी पर विराजमान हैं। ओड़िसा में ऐसी जनश्रुति है कि वर्ष 2024 से लेकर 2033 तक दुनिया में सबकुछ बदल जाएगा।
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