सुशील कुमार शर्मा

वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा
भाषा भावों और विचारों की संवाहक होती है। भाषा का स्‍वरूप निरंतर बदलता रहता है और यह सभी भाषाओं के बारे में कहा जा सकता...
शिक्षा सुसंस्कृत बनाने का माध्यम है। यह हमारी संवेदनशीलता और दृष्टि को प्रखर करती है जिससे राष्ट्रीय एकता पनपती है,...
शिव लिंगरूप बहिरंग हैं, नमामि शम्भो। शिव ध्यानरूप अंतरंग हैं, नमामि शम्भो। शिव तत्व ज्ञानस्वरूप हैं, नमामि शम्भो। शिव...
अटल मौन देखो हुआ, सन्नाटा सब ओर। अंतिम यात्रा पर चले, भारत रत्न किशोर।
तुलसी का ‘रामचरित मानस’ हिन्दी साहित्य का सर्वोत्तम महाकाव्य है जिसकी रचना चैत्र शुक्ल नवमी 1603 वि. में हुई थी तथा जिसको...
अहंकार के कई फन फैले हैं शेषनाग की तरह मेरे सिर पर झूलते हैं, फुफकारते हैं लोगों को डराते हैं अहंकार के ये नाग निकलते...
सबसे महान होती हैं भारत की बेटियां, हम सबकी शान होती हैं भारत की बेटियां। जिस दिन से घर में आती हैं बेटियां, माता-पिता...
शिव है अंत:शक्ति, शिव सबका संयोग। शिव को जो जपता रहे, सहे न कभी वियोग। शिव सद्गुण विकसित करें, जाग्रत मन-मस्तिष्क
कांधे पर टंगा बस्ता चॉकलेट की बचपनी चाहत। और फिर बांबियों-झाड़ियों में से निकलते वे सांप, भेड़िये और लकड़बग्घे
पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों में हवा, पानी, मिट्टी, खनिज, ईंधन, पौधे और जानवर शामिल हैं। इन संसाधनों की देखभाल करना और...
विमल बहुत परेशान था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो इस परिस्थिति से कैसे निबटे। वो अपनी मां को बहुत चाहता था किंतु उसकी...
आतंकियों का अधिकांश देशों में साम्राज्य हिरण्यकशिपु के आतंक की याद दिलाता है। प्रह्लाद आज भी इन हिरण्यकशिपुओं का...
तेईस मार्च को तीन वीर, भारतमाता की गोद चढ़े। स्वतंत्रता की बलवेदी पर,
मानवता अपना ले बंदे, मिट जाएंगे सारे फंदे। प्रभु ने तुझको जनम दिया है, तुझ पर ये उपकार किया है।
गरीब की रोटी से, लटकती सियासत, किसान खून से लथपथ सियासत कभी सत्ता में, कभी विपक्ष में, सियासत
प्रवासी अपनी जड़ों से दूर बरगद की भांति फैलते हैं और उन जड़ों को सींचते हैं भारत के संस्कारों के पानी से।
नारी का सम्मान, बचाना धर्म हमारा, सफल वही इंसान, लगे नारी को प्यारा। जीवन का आधार, हमेशा नारी होती,
होली के हुड़दंग का, बड़ा अजब है हाल, हर चेहरा खुशरंग है, जीवन बना गुलाल।
नवल किशोरी खेलत होरी प्रीत कुसुम संग बंधी है डोरी, कान्हा ने जब बांह मरोरी, सखियां करती जोराजोरी
किन्नर कौन? वो जो धर्म की आड़ में, अस्मत लूटता है।