पिछले 24 घंटे में म्यांमार में भूकंप के 15 से ज्यादा झटके लग चुके हैं। अब तक 1000 मौतों की बात सामने आ रही है। 2300 से ज्यादा घायल हैं। सैकडों के मलबे में दबे होने की आशंका है। 7.7 की तीव्रता के साथ आए इस जलजले में मौत का आंकड़ा 10 हजार से ज्यादा हो सकता है। यह आशंका यूनाइटेड स्टेट जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने जताई है।
रॉयटर्स के मुताबिक म्यांमार की सैन्य सरकार ने कहा है कि मरने वालों का आंकड़ा 1 हजार को पार कर गया है, जबकि 2300 से ज्यादा लोग घायल हैं। बता दें कि म्यांमार में शुक्रवार की सुबह 11 बजकर 50 मिपट पर 7.7 तीव्रता का भूकंप आया। रिपोर्ट के मुताबिक म्यांमार और थाईलैंड में यह 200 साल का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा तबाही भूकंप है। भारी तबाही के चलते म्यांमार के 6 राज्यों और पूरे थाईलैंड में इमरजेंसी लगा दी गई है। भूकंप के बाद भारत ने म्यांमार को 15 टन राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है। इसे ऑपरेशन ब्रह्मा नाम दिया गया है।
भूकंप का असर 900 किलोमीटर दूर तक : म्यांमार में आए भूकंप का असर 900 किलोमीटर दूर थाइलैंड के बैंकॉक तक में देखा गया, जहां कुछ इमारतें ज़मींदोज़ हो गईं। पुलिस और डॉक्टर्स ने बताया कि बैंकॉक में एक निर्माणाधीन 30 मंजिला इमारत ढह गई, जिसमें 43 श्रमिक वहां फंस गए। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए फुटेज में देखा जा सकता है कि ये गगनचुंबी इमारत कुछ ही सेकंड में मलबे नें तब्दील हो गई।
म्यांमार ने इंटरनेट सेवा बंद की : भूकंप के बाद म्यांमार ने इंटरनेट सेवा बंद कर दी है। जिसकी वजह से भूकंप से कई इलाकों में हुए नुकसान की जानकारी सामने नहीं आ पा रही है। द ग्लोबल न्यू लाइट ऑफ़ म्यांमार नाम के एक सरकारी अखबार के मुताबिक कई इमारतें और पुल गिर गए हैं।
334 परमाणु विस्फोट के बराबर एनर्जी : भूकंप ने 334 परमाणु विस्फोट के बराबर एनर्जी पैदा की जियोलॉजिस्ट के मुताबिक म्यांमार में आए भूकंप ने 334 परमाणु बम विस्फोट के बराबर एनर्जी पैदा की। जेस फीनिक्स ने CNN से बात करते हुए कहा कि भूकंप के बाद आने वाले झटके कुछ महीनों तक रह सकते हैं।
कहां और कैसी हैं आंग सान सूची : म्यांमार की पूर्व प्रधानमंत्री आंग सान सूची सुरक्षित हैं। यह जानकारी बीबीसी ने अपने सूत्रों के हवाले जारी की है। बता दें कि सूची म्यांमार की जेल में कैद हैं। म्यांमार में सेना ने 2021 में तख्तापलट कर दिया था। इसके बाद सूची को हिरासत में रखा गया था। साल 2023 में भ्रष्टाचार समेत कई आरोपों में उन्हें जेल भेज दिया गया।
भारत, चीन, अमेरिका समेत कई देशों ने पहुंचाई मदद : भूकंप के बाद भारत ने मदद की। 15 टन वाली राहत सामग्री की पहली खेप वहां पहुंचाई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इसे ऑपरेशन ब्रह्मा नाम दिया गया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि म्यांमार के लोगों के लिए पहली खेप के रूप में तात्कालिक मानवीय सहायता भेजी गई है। डोनाल्ड ट्रम्प ने म्यांमार की मदद का ऐलान किया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका भूकंप से प्रभावित म्यांमार की मदद करेगा। ट्रम्प ने कहा कि म्यांमार में जो हुआ वह भयानक है। हमने पहले ही वहां बात कर ली है। जल्द ही मदद पहुंचेगी। इसी तरह चीन ने भी म्यांमार को ममद भेजी है। दूसरे कई देश ममद के लिए हाथ आगे बढा रहे हैं।
1300KM दूर बैंकॉक में कैसे मची तबाही: म्यांमार में 7.7 रेक्टर पैमाने के भूकंप ने वहां तबाही मचा दी है। सिर्फ म्यांमार ही नहीं, थाइलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी काफी तबाही मची है। बैंकॉक, म्यांमार के उस सगाइंग क्षेत्र से करीब 1300KM दूर है, जहां भूकंप का केंद्र था, इसके बावजूद कई मकान ढह गए हैं। कई लोगों के मारे जाने की खबर भी आई है, हालांकि अभी मृतकों की संख्या सामने नहीं आई है। लेकिन शुरूआती जानकारी के मुताबिक 59 लोगों के मारे जाने की खबर है। हालांकि सगाइंग क्षेत्र से करीब 300KM की दूरी पर स्थित भारत में इसका असर नहीं हुआ है। लेकिन दुनिया के पांच देशों की सीमाओं पर धरती कांप उठी है।
कहां था भूकंप का केंद्र : भूकंप का केंद्र (एपिसेंटर) म्यांमार में था, और भारत के इलाके उससे कुछ दूरी पर स्थित थे। भूकंपीय तरंगें दूरी के साथ अपनी ऊर्जा खो देती हैं। पूर्वोत्तर भारत में झटके महसूस हुए, लेकिन केंद्र से दूरी के कारण उनकी तीव्रता कम हो गई। लेकिन इसका सबसे बड़ा असर टेक्टोनिक प्लेटों की वजह से कम हुआ। बता दें कि म्यांमार में एक के बाद एक भूकंप के 6 झटके लगे।
किन देशों में भूकंप से कांपी धरती : बता दें कि शुक्रवार को म्यांमार में 7.7 और 6.4 तीव्रता के दो भूकंप की वजह से थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी तेज झटके लगे। वहीं, भारत के मेघालय और पूर्वोत्तर राज्यों में भी महसूस किए गए। इसके अलावा बांग्लादेश और चीन के यूनान प्रांत में भी भूकंप के झटके लगे। भारत के पूर्वोत्तर इलाकों में भूकंप संभावित क्षेत्र होने के कारण वहां के लोग और प्रशासन पहले से सतर्क रहते हैं। बता दें कि म्यांमार में ऐसी तैयारी कम थी, तो वहां तबाही ज्यादा हुई। जबकि भारत के लोग इसके लिए पहले से अलर्ट रहते हैं।
1.7 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं बैंकाक में : प्रत्यक्षदर्शी लोगों ने बताया कि इमारतें हिल रही थी और कुछ ही देर में कई इलाके धूल व मलबा और गुब्बार में तब्दील हो गए। यह बहुत तेजी से हुआ। बैंकाक में दोपहर करीब 1:30 बजे भूकंप आने पर इमारतों में चेतावनी अलार्म बजने लगे और घबराए हुए निवासियों को ऊंची इमारतों और होटलों की सीढ़ियों से नीचे उतारा गया। बैंकाक क्षेत्र में 1.7 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं, जिनमें से अधिकांश ऊंची इमारतों में रहते हैं। रिपोर्ट : नवीन रांगियाल