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कविता: जनकवि
सुशील कुमार शर्मा
मानव हृदय पर राज करे,
वह जनकवि कहलाता है।
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कवि को जनकवि बनाता है।
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आत्मनिष्ठ और शाश्वत दृष्टा,
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वह जनकवि कहलाता है।
शिशु सदृश्य जिसका मन होता,
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सृष्टि के सौंदर्य को जो,
सबके हृदय में बिठलाता है।
मानव हृदय पर राज करे,
वह जनकवि कहलाता है।
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वह सम्मान सुहाता है।
मानव हृदय पर राज करे,
वह जनकवि कहलाता है।
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