उन्होंने फोन पर बताया, मैंने कानून के क्षेत्र में इसलिए प्रवेश किया क्योंकि मैं जानती थी कि सिंध के पिछड़े इलाकों में गरीब लोगों को कानूनी मामलों में सलाह एवं मदद की बहुत जरूरत है। उन्होंने कहा, “मेरे पिता एवं मेरे परिवार ने मुझे बहुत प्रोत्साहित किया क्योंकि हमारे समुदाय में महिलाओं के लिए ऐसे क्षेत्र में प्रवेश कर पाना आसान नहीं है।
उनके पिता डॉ पवन कुमार बोदान चाहते थे कि उनकी बेटी गरीब लोगों को खासकर हिंदू समुदाय के लोगों को मुफ्त कानूनी मदद दे। सुमन के पिता ने कहा, सुमन ने चुनौतीपूर्ण पेशा चुना लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि वह ईमानदारी एवं कठिन परिश्रम से ऊंचा मुकाम हासिल करेंगी। सुमन के पिता नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं और उनकी बड़ी बहन सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और दूसरी बहन अकाउंटेंट हैं।
पाकिस्तान में हिंदू समुदाय के किसी व्यक्ति को न्यायाधीश नियुक्त किए जाने का यह पहला मामला नहीं है। पहले हिंदू न्यायाधीश जस्टिस राणा भगवानदास थे जिन्होंने 2005 से 2007 के बीच संक्षिप्त अवधि के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर सेवाएं दी थी। पाकिस्तान की कुल आबादी में दो प्रतिशत हिंदू हैं और इस्लाम के बाद देश में हिंदू धर्म दूसरा सबसे बड़ा धर्म है।