Hanuman Jayanti 2024: हनुमान जयंती कब है? जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

WD Feature Desk

बुधवार, 3 अप्रैल 2024 (17:25 IST)
When is Hanuman Jayanti 2024: हनुमान जन्मोत्सव वर्ष में 5 बार मनाया जाता है। पहला चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन, दूसरा कार्तिक माह की नरक चतुर्दशी पर, तीसरा तमिलनाडु और केरल में मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन, चौथा कर्नाटक में मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष त्रयोदशी को और पांचवा उड़ीसा में वैशाख महीने के पहले दिन मनाई जाती है। उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस बार 23 अप्रैल को यह जन्मोत्सव रहेगा।
 
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ- 23 अप्रैल 2024 को 03:25 am. 
पूर्णिमा तिथि समाप्त- 24 अप्रैल 2024 को 05:18 am.
ALSO READ: अद्भुत है राम वृक्ष, हनुमानजी से जुड़ी है इसके अस्तित्व की कहानी
हनुमान पूजा के शुभ मुहूर्त : 
ब्रह्म मुहूर्त : प्रात: 04:20 से 05:04 तक।
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:53 से दोपहर 12:46।
विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 से 03:23 तक।
गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:50 से 07:12 तक।
निशीथ मुहूर्त : रात्रि 11:57 से 12:41 के बीच।
hanuman jayanti 2024
हनुमान पूजा की विधि- Hanuman puja ki vidhi :-
 
- प्रात:काल स्नान-ध्यान से निवृत हो व्रत का संकल्प लें और पूजा की तैयारी करें।
 
- हनुमानजी की मूर्ति या चि‍त्र को लाल या पीला कपड़ा बिछाकर लकड़ी के पाट पर रखें और आप खुद कुश के आसन पर बैठें।
ALSO READ: सेतु बनाते वक्त जब श्रीराम का फेंका पत्थर पानी में नहीं तैरा तो हनुमानजी ने ये कहा...
- मूर्ति को स्नान कराएं और यदि चित्र है तो उसे अच्छे से साफ करें।
 
- इसके बाद धूप, दीप प्रज्वलित करके पूजा प्रारंभ करें। हनुमानजी को घी का दीपक जलाएं।
 
- हनुमानजी को अनामिका अंगुली से तिलक लगाएं, सिंदूर अर्पित करें, गंध, चंदन आदि लगाएं और फिर उन्हें हार और फूल चढ़ाएं।
 
- यदि मूर्ति का अभिषेक करना चाहते हैं तो कच्चा दूध, दही, घी और शहद यानी पंचामृत से उनका अभिषेक करें, फिर पूजा करें।
 
- अच्छे से पंचोपचार पूजा करने के बाद उन्हें नैवेद्य अर्पित करें। नमक, मिर्च और तेल का प्रयोग नैवेद्य में नहीं किया जाता है।
 
- गुड़-चने का प्रसाद जरूर अर्पित करें। इसके आलावा केसरिया बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू, चूरमा, मालपुआ या मलाई मिश्री का भोग लगाएं।
 
- यदि कोई मनोकामना है तो उन्हें पान का बीड़ा अर्पित करके अपनी मनोकामना बोलें।
 
- अंत में हनुमानजी की आरती उतारें और उनकी आरती करें। 
ALSO READ: नरक चतुर्दशी पर भी हनुमानजी का जन्मोत्सव क्यों मनाया जाता है?
- उनकी आरती करके नैवेद्य को पुन: उन्हें अर्पित करें और अंत में उसे प्रसाद रूप में सभी को बांट दें।
 

वेबदुनिया पर पढ़ें

सम्बंधित जानकारी