मुट्ठी में है तकदीर हमारी....!

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फिल्म शोले में आपने अमिताभ बच्चन को धर्मेन्द्र के साथ एक सिक्के को उछालते हुए जरूर देखा होगा या फिर दीवार फिल्म में बिग बी का बाजुओं में पहना 786 नंबर का बिल्ला तो आपको भलीभाँति याद होगा। सलमान खान के हाथ में जो ब्रेसलेट पहना है उसकी तरफ तो आपका ध्यान गया ही होगा। रील लाइफ और रियल लाइफ में इन तमाम चीजों को नायक के लिए बहुत ही लकी बताया गया है।

इस संसार में कई सारे लोग हैं जिन्होंने ऎसी ही कोई न कोई चीज को अपने से लगाकर रखा है। वह उन्हें 'लकी' मानते हैं। किसी वक्त गरीबी की रेखा में जीने वाले और आज आलीशान बंगले में रहने वाले कई रईस शहजादों की अलमारी की अगर पूरी तरह से छानबीन की जाए तो आपको जरूर उसकी पुरानी घड़ी, पुरानी चप्पल, यहाँ तक कि उसकी पुरानी बनियान भी मिल जाएगी।

उन लोगों ने इन चीजों को बड़े जतन के साथ सँभालकर रखा है। वैसे उन्हें पुरानी चीजें इकठ्ठी करने का शौक नहीं है। वे तो बस इन चीजों को अपने लिए सौभाग्यशाली मानते हैं। उन्होंने खुद ही इन चीजों के ऊपर सौभाग्यशाली होने का ठप्पा लगा दिया है।

वैसे हर इंसान का अपना-अपना सौभाग्य और दुर्भाग्य होता है। जब भी वह बुरे दौर से गुजरता है तो वह अपने भाग्य को कोसता है और जब भी उसका अच्छा समय आता है तो वही इंसान अपने भाग्य के सितारों की तारीफ करते हुए फूला नहीं समाता। दुनिया में कुछ लोग ऎसे भी हैं जिनको जन्म से ही मुँह में चाँदी की चम्मच मिल जाती है। अर्थात वह जन्म से ही भाग्यशाली है ऎसा कहा जाता है। किन्तु क्या जिन लोगों के मुँह में यह चम्मच नहीं वह दुर्भाग्यशाली हैं? क्या वह लोग अपने भाग्य को अपने प्रति आकर्षित नहीं कर सकते और दुर्भाग्य को अपने से दूर नहीं रख सकते?

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शोधकर्ताओं का मानना है कि दुनिया का हर इंसान अपने भाग्य को अपनी तरफ खींच सकता है। बशर्ते भाग्य क्या है उसकी व्याख्या को वह पूरी तरह समझ सकें। भाग्य और कुछ भी नहीं है, वह तो सिर्फ आपके द्वारा सही समय पर, सही वस्तु या व्यक्ति पर, सही निर्णय लेने का एक सुखद परिणाम है।

वैसे यह बात भी सही है कि दुनिया में कुछ चीजें और फैसले ऎसे होते हैं जो हमारे नियंत्रण में नहीं रहते लेकिन ध्यान से देखें तो उन चीजों की संख्या 100 में से महज 10 है, बाकी के 90 हमारे पक्ष में हैं। दूरदृष्टि दिखाने वाली दूरबीन अगर आपके पास है तो आप देखेंगे कि आपके आसपास ऎसे कई सारे लोग हैं जिन्होंने खुद ही अपने सिर पर दुखी और दुर्भाग्यशाली होने का ताज पहनकर रखा है। दरअसल उन्होंने अपने पूरे जीवन में अच्छा भाग्य बनाने के बारे में कभी सोचा ही नहीं।

रिचर्ड वाइसमैन नाम के एक विदेशी लेखक ने इन्हीं लोगों को ध्यान में रखकर एक पुस्तक लिखी है जिसका शीर्षक है ''Changing your luck, Changing your life'' इस पुस्तक में व्यक्ति को सौभाग्यशाली बनाने के सिद्धांतों के बारे में उल्लेख किया गया है। जिसके लिए वाइसमैन ने पूरे आठ साल तक अध्ययन किया।

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वाइसमैन ने इसके लिए लोगों से कुछ सवाल भी पूछे हैं। जैसे, क्या आप नए विचारों और उन पर फायदा उठाने के लिए खुले मन से तैयार हैं? क्या आप आशावादी या बहीर्मुखी हैं? क्या आप अपनी आंतरिक भावनाओं को सुनना चाहते हैं? क्या आप चाहते हैं कि आपके साथ सब अच्छा घटित हो? क्या कभी आपने अपनी विफलताओं को रोकने का प्रयास किया या फिर उन असफलताओं से कुछ सीखा?

अगर आप इन सभी सवालों में पूरी तरह फिट बैठते हैं और आपका जवाब 'हाँ' है तो यह तय है कि आप उन अच्छी चीजों को आसानी से 'डील' कर सकते हैं। जिसे आमतौर पर यह दुनिया 'किस्मत' के नाम से जानती है। यदि आप इस खेल में अपने मन से जितने का लक्ष्य निर्धारित करेंगे उस तक पहुँचने में आने वाली तमाम बाधाएँ आपसे दूर हो जाएँगी। लेकिन आपने शुरुआत से ही हार मान ली तो यही चीजें आपका दुर्भाग्य बनकर सामने आएँगी।

तो फिर. अब आप खुद ही तय कीजिए कि आप सौभाग्यशाली हैं या दुर्भाग्यशाली!

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