शिकारियों के फोन टेप होंगे!

बुधवार, 6 मई 2009 (11:25 IST)
-रामकुमार भारती
लकड़ी तस्करी और जानवरों के शिकार से हलाकान वन महकमा अब अपराधियों तक पहुँचने के लिए उनके फोन टेप कराने की जुगत में है। यह कार्य सीआईडी की मदद से होगा। इसके लिए नेशनल क्राइम ब्यूरो (वाइल्ड लाइफ) अभी चुनिंदा तस्करों के फोन नंबरों का चयन कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक वन मुख्यालय ने छतरपुर जिले के बड़ामलेहरा में पारधी और बहेलिया जाति से मिले टेलीफोन नंबरों को नेशनल क्राइम ब्यूरो दिल्ली भेजा था। ब्यूरो डायरेक्टर रीना मित्रा के अनुरोध पर जब एडीजी सीआईडी रमेश शर्मा ने इन नंबरों की जाँच कराई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

यह खुलासा हुआ कि प्रदेश में सक्रिय शिकारियों और तस्करों का नेटवर्क चीन और नेपाल से जुड़ा है। इनके गुर्गे टाइगर रिजर्व के आसपास फैले हैं, जो बाघों को करंट या जहर देकर मारने के बाद उसकी खालों की तस्करी करते हैं। यह गिरोह बहेलिया और पारधी जाति को पैसे का लालच देकर बाघों और तेंदुए का शिकार करा रहा है। सारा खेल मोबाइल और टेलीफोन के जरिए हो रहा है।

जासूसों के मेहनताने में बढ़ोतरी : पन्ना, कान्हा, पेंच, बांधवगढ़, सतपुड़ा और संजय टाइगर रिजर्व के आसपास छोड़े गए जासूसों के मेहनताने में अब बढ़ोतरी होगी। अब तक इन्हें मामूली रकम दी जाती है, जो सीएफ स्तर के अधिकारी तय करते हैं। वहीं भोपाल, रीवा, छिंदवाड़ा सहित कई ऐसे जिले हैं, जहाँ जासूसी के नाम पर मिलने वाली राशि का इस्तेमाल ही नहीं किया गया। लिहाजा वन विभाग इस राशि को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। जनवरी 06 से 08 तक करीब दस लाख रुपए जासूसों पर खर्च किए जा चुके हैं।

संवेदनशील व अतिसंवेदनशील जिले : वन्य प्राणियों के शिकार के मामलों की जाँच और शिकारियों को पकड़ने टाइगर सेल ने बालाघाट, भोपाल, छिंदवाड़ा, कटनी ,मंडला, सतना, विदिशा, उमरिया डिंडोरी और सिवनी को अतिसंवेदशील जिलों में तथा बैतूूल, ग्वालियर, होशंगाबाद, हरदा, इंदौर, खंडवा, नरसिंहपुर, पन्नाा, रतलाम, रीवा, सीधी, सीहोर, शिवपुरी, टीकमगढ़ को संवेदनशील जिलों में शामिल किया है।

मुख्य वन सरंक्षक वन्यप्राणी के प्रधान डॉ. एचएस पाबला न कहा कि वन अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस के माध्यम से फोन टेपिंग कराई जा सकती है। इससे शिकारियों और तस्करों को पकड़ने में मदद मिलती है।-नईदुनिया

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