यूनियन कार्बाइड के कचरे को भस्म करने के दूसरे दौर का परीक्षण टला, बुधवार शाम से शुरू होने की संभावना

वेबदुनिया न्यूज डेस्क

मंगलवार, 4 मार्च 2025 (22:04 IST)
Union Carbide's waste: पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के एक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में भोपाल के यूनियन कार्बाइड (Union Carbide) कारखाने के कचरे को जलाने के दूसरे दौर का परीक्षण भस्मक और अन्य उपकरणों की सफाई जारी रहने के कारण मंगलवार को टल गया जिसके बुधवार शाम से शुरू होने की संभावना है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
 
भोपाल में बंद पड़े यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे के निपटान की योजना के तहत इसे सूबे की राजधानी से करीब 250 किलोमीटर दूर पीथमपुर में एक निजी कंपनी द्वारा संचालित अपशिष्ट निपटान संयंत्र में 2 जनवरी को पहुंचाया गया था। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक इस कचरे के निपटान का परीक्षण सुरक्षा मानदंडों का पालन करते हुए 3 दौर में किया जाना है और अदालत के सामने तीनों परीक्षणों की रिपोर्ट 27 मार्च को पेश की जानी है।ALSO READ: क्यों पीथमपुर में ही जलेगा यूनियन कार्बाइड का कचरा, किस प्रक्रिया से होगा नष्ट, वेबदुनिया के सवाल पर क्या बोले संभागायुक्त दीपक सिंह
 
राज्य के जनसंपर्क विभाग की जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि पहले दौर के परीक्षण के बाद भस्मक को ठंडा होने के लिए छोड़ा गया है जिसमें 18 से 20 घंटे का समय लगता है। विज्ञप्ति में बताया गया कि भस्मक और बैग फिल्टर की सफाई के कारण मंगलवार को दूसरा परीक्षण शुरू नहीं किया जा सका जिसके बुधवार शाम से प्रारंभ होने की संभावना है।
 
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र में यूनियन कार्बाइड कारखाने के 10 टन कचरे को परीक्षण के तौर पर भस्म करने का पहला दौर 28 फरवरी से शुरू हुआ, जो 3 मार्च (सोमवार) को खत्म हुआ। उन्होंने बताया कि भस्मक और अन्य उपकरणों की सफाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दूसरे दौर का परीक्षण शुरू होगा जिसके तहत यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे के 10 टन की एक और खेप को भस्म किया जाएगा।
 
द्विवेदी ने बताया कि पहले दौर का परीक्षण करीब 75 घंटे चला था और इस दौरान संयंत्र के भस्मक में हर घंटे 135 किलोग्राम कचरा डाला गया था। उन्होंने बताया कि दूसरे दौर के परीक्षण के दौरान भस्मक में हर घंटे 180 किलोग्राम कचरा डाला जाना है।ALSO READ: यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का खौफ होगा खत्म, प्रशासन ने उठाया बड़ा कदम
 
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक कचरे के निपटान के पहले दौर में इस संयंत्र से पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, हाइड्रोजन क्लोराइड, हाइड्रोजन फ्लोराइड और टोटल ऑर्गेनिक कार्बन का उत्सर्जन मानक सीमा के भीतर पाया गया था।
 
प्रदेश सरकार के मुताबिक यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे में इस बंद पड़ी इकाई के परिसर की मिट्टी, रिएक्टर अवशेष, सेविन (कीटनाशक) अवशेष, नेफ्थाल अवशेष और अर्द्ध प्रसंस्कृत अवशेष शामिल हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि वैज्ञानिक प्रमाणों के मुताबिक इस कचरे में सेविन और नेफ्थाल रसायनों का प्रभाव अब लगभग नगण्य हो चुका है।
 
बोर्ड के मुताबिक फिलहाल इस कचरे में मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का कोई अस्तित्व नहीं है और इसमें किसी तरह के रेडियोधर्मी कण भी नहीं हैं। भोपाल में 2 और 3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ था।इससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए थे और हजारों लोग अपंग हो गए थे। इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में से एक माना जाता है।
 
भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कारखाने का कचरा पीथमपुर लाए जाने के बाद इस औद्योगिक क्षेत्र में कई विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने इस कचरे के निपटान से इंसानी आबादी और आबो-हवा को नुकसान की आशंका जताई है जिसे प्रदेश सरकार ने सिरे से खारिज किया है। प्रदेश सरकार का कहना है कि पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे के सुरक्षित निपटान के पक्के इंतजाम हैं।(भाषा)
 
Edited by: Ravindra Gupta

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