kab hai makar sankranti 2026: मकर संक्रांति को लेकर लोगों में कंफ्यूजन है कि वे इस पर्व को कब मनाएं, क्योंकि 14 तारीख 2026 को सूर्य का मकर राशि में गोचर दोपहर बाद करीब 03 बजकर 13 मिनट पर होगा। इस मान से कई लोगों का कहना है कि मकर संक्रांति 03:13 मिनट बाद मनाएं या फिर उदयातिथि के अनुसार अलगले दिन यानी 15 जनवरी को मनाएं। 14 तारीख को एकादशी होने के कारण भी असमंजस की स्थिति है। ऐसे चलिए करके हैं आपका कंफ्यूजन दूर।
1. उदयातिथि से नहीं मानते हैं संक्रांति काल को:
चंद्र: उदयातिथि का सिद्धांत वहां लागू होता है जहां पर किसी पर्व या त्योहार में तिथि का महत्व रहता है। तिथियां चंद्र पर आधारित रहती है जो एक दिन की ही रहती है। अर्थात इसका प्रारंभ और अंत 24 घंटे के अंतराल में हो जाता है। जैसे एकादशी तिथि एक ही दिन की रहती है।
सूर्य: मकर संक्रांति का पर्व चंद्र नहीं सूर्य पर आधारित पर्व है। सूर्य जिस दिन मकर राशि में प्रवेश करता है उसी दिन के उस संक्रमरण काल को ही पुण्य काल कहते हैं। यह पुण्य काल करीब 2 से ढाई घंटे का रहता है। इसी काल में दान पुण्य करना या पर्व मनाया जाना शास्त्र सम्मत माना गया है।
2. मकर संक्राति का पुण्य काल:
मकर संक्रांति पुण्य काल: 14 जनवरी को दोपहर बाद 03:13 से शाम को 05:45 तक रहेगा। अर्थात करीब 02 घण्टे 32 मिनट्स तक यह पुण्य काल रहेगा।
एकादशी तिथि समाप्त: जनवरी 14, 2026 को शाम 05:52 तक।
विशेष: शाम 05:52 तक चावल का न तो दान करें और न ही इसे किसी भी रूप में ग्रहण करें। तिथि समाप्ति के बाद दान और ग्रहण दोनों कर सकते हैं। इससे पहले संक्रांति काल में अन्य वस्तुओं का दान कर सकते हैं और उन्हें ग्रहण भी कर सकते हैं। जैसे तिल, गुड़, घी, आटा, तेल या अन्य सामग्री।