दरारों से रिसता दर्द, उत्तराखंड के जोशीमठ का अस्तित्व खतरे में

'गेटवे ऑफ इंडिया' के नाम से प्रसिद्ध जोशीमठ अपने पौराणिक, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। चमोली जिले में स्थित जोशीमठ का दूसरा नाम ज्योतिर्मठ है। जोशीमठ का अस्तित्व खतरे में दिखाई देने लगा है, क्योंकि भूस्खलन के कारण लगातार क्षेत्र के सभी के घरों में मोटी-मोटी दरारें आ गई हैं, लोग दहशत में हैं। भू-धंसाव को लेकर केन्द्र सरकार और राज्य सरकार गंभीर है और लगातार जोशीमठ की मॉनिटरिंग कर रही है। वहीं अब तक जोशीमठ से 66 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है।
 
भारत-तिब्बत सीमा से मात्र 100 किमी दूर : जोशीमठ भारत-तिब्बत सीमा से महज 100 किलोमीटर दूर है। पर्यटन का शौक रखने वाले पर्यटकों को हेमकुंड साहिब, औली, फूलों की घाटी आदि स्थानों पर जाने के लिए जोशीमठ से होकर गुजरना पड़ता है। लेकिन तेजी से हो रहे से भू-धंसाव का दायरा तीव्रगति से अब भारत-तिब्बत सीमा की तरफ बढ़ रहा है। भूगर्भवेत्ताओं का मानना है कि यदि यह भू-धंसाव ऐसे ही होता रहा तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, जो देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा है।
 
पुरानी रिपोर्टों पर भी सरकार की नजर : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने पुष्कर सिंह धामी जोशीमठ में हो रहे भू-धंसाव को लेकर बेहद चिन्तित है, वह उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक करते हुए कि हालात पर नजर बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री धामी ने आपदा प्रबंधन के सचिव और अन्य अधिकारियों को क्षेत्र में भेजा हुआ है, सभी अधिकारी जोशीमठ में कैंप कर रहे हैं। इसके साथ ही जोशीमठ को लेकर जो भी पुरानी रिपोर्ट हैं, सरकार उनका भी अध्ययन कर रही है। जोशीमठ को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। 
 
गेटवे ऑफ इंडिया (जोशीमठ) चमोली जिले में 6150 फीट (1875 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है, यह बद्रीनाथ जैसे पवित्र धाम के केंद्रों का प्रवेश द्वार है। जोशीमठ आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख पीठों में से एक है। भू-धंसाव की मार झेल रहे इस ऐतिहासिक शहर में आज निरीक्षण के लिए भूगर्भीय टीम और आपदा प्रबंधन के आयुक्त रंजीत सिन्हा के नेतृत्व में एक संयुक्त दल पहुंचा।
टीम ने भू-धंसाव क्षेत्र की जांच के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रशासन ने अब तक आपदा प्रभावित 50 से अधिक परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया है। सरकार की पहली प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और उनकी मदद करना है।
 
रिसता पानी बन सकता है खतरा : आपदा प्रबंधन और भूगर्भ टीम के मुताबिक किसी अज्ञात स्थान से पानी रिस रहा है, जो बड़ा खतरा साबित हो सकता है। इसलिए भवन निर्माण में कड़े नियमों का पालन किए जाने की जरूरत है। गढ़वाल के मंडलायुक्त सुशील कुमार के मुताबिक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। भूस्खलन की चपेट में आए होटलों में पर्यटकों के ठहरने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
 
घरों में पड़ती दरारें और धंसती जमीन को देखकर हर कोई हैरत में है, सरकार से लेकर वहां रहने वाले लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर रही हैं। प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से जोशीमठ में स्थित एशिया की सबसे लंबी रोपवे सेवा को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया है।
 
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार शाम को अब तक जोशीमठ में हुए कार्यों की समीक्षा बैठक लेंगे। भू-धंसाव से प्रभावित कितने लोगों को शिफ्ट किया गया है, उनका फीडबैक लेंगे। वही उम्मीद की जा रही है वह आपदा प्रभावित क्षेत्र जोशीमठ का दौरा भी कर सकते है। आपदा प्रबंधन आयुक्त मान रहे हैं कि जोशीमठ की स्थिति विकट है, जल्दी ही स्थिति को नियत्रंण में करना होगा।
 
पीड़ित परिवारों को मिलेगी मदद : जोशीमठ भू-धंसाव क्षेत्र को लेकर उत्तराखंड सरकार बेहद गंभीर है, जिसके चलते प्रभावितों क्षेत्र के लोगों को लेकर फैसला जिला प्रशासन की तरफ से लिया गया है। जिन लोगों के घर खतरे की जद में हैं  या रहने योग्य नहीं है, उन्हें आगामी 6 माह तक मकान के किराए के रूप में 4000 रुपए प्रति परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रदान की जाएगी।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए कि तत्काल सुरक्षित स्थान पर एक बड़ा अस्थायी पुनर्वास केंद्र बनाकर पीड़ितों को शरण दी जाएं, वहीं जोशीमठ में सेक्टर और जोनल वार योजना बनाई जाए। तत्काल प्रभाव से डेंजर जोन क्षेत्र को खाली करवाया जाए और जोशीमठ में अविलंब आपदा कंट्रोल रूम एक्टिवेट किया जाएं। 
 

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