यादव ने कहा कि कांग्रेस को पहले से संदेह था कि इस नीति में बहुत सारी अनियमितताएं हैं जिससे सरकार के राजस्व पर असर पड़ने वाला है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जांच एजेंसियों को शराब नीति से जुड़ी लिखित शिकायत भी दी थी जिसमें भाजपा के संलिप्त होने के भी सबूत थे। उन्होंने कहा कि ऐसे में सवाल है कि विधानसभा में शराब नीति से जुड़ी सभी 14 रिपोर्टें पेश क्यों नहीं की गईं?
यादव ने दावा किया कि भाजपा के कुछ बड़े नेता और तत्कालीन उपराज्यपाल की भूमिका से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल हैं, जो इस कैग रिपोर्ट में नजरअंदाज कर दिए गए। उन्होंने सवाल किया कि साल के अंदर 3 आबकारी निदेशकों को बदलने का निर्णय क्यों और किसने लिया? दिल्ली में शराब के नए ब्रांड को बढ़ावा देना का काम किया गया, इसकी जांच होनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि पूर्व की केजरीवाल सरकार की शराब नीति को लागू करने की अनुमति तत्कालीन राज्यपाल ने दी थी, आज तक इस पर कोई जांच क्यों नहीं हुई?(भाषा)